दलित बस्ती को मिली नई पहचान गुरु रविदास जयंती पर तियरी गांव में ऐतिहासिक कदम
अम्बेडकर व रविदास की मूर्तियों की स्थापना

इलिया (चंदौली)। क्षेत्र के तियरी गांव में रविवार को गुरु रविदास जयंती के पावन अवसर पर सामाजिक समरसता और समानता की एक प्रेरक मिसाल सामने आई। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह की पहल पर चकिया–इलिया मार्ग से सटी दलित बस्ती में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं संत शिरोमणि गुरु रविदास की पत्थर की भव्य मूर्तियों की स्थापना कराई गई, जिससे गांव को एक नई पहचान मिली।

मूर्ति स्थापना से गांव में उत्साह का माहौल
मूर्ति स्थापना के बाद पूरे गांव में हर्षोल्लास का वातावरण रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्यक्रम में शामिल हुए और महापुरुषों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
“ महापुरुष किसी एक समाज के नहीं” — छत्रबली सिंह
सभा को संबोधित करते हुए छत्रबली सिंह ने कहा कि संत रविदास और बाबा साहब अंबेडकर किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के मार्गदर्शक हैं। गुरु रविदास ने समानता, प्रेम और मानवता का संदेश दिया, जबकि डॉ. अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से शोषित और वंचित वर्गों को अधिकार और सम्मान दिलाया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब हर व्यक्ति को समान अवसर और न्याय मिले।

आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र
उन्होंने बताया कि दलित बस्ती में इन महापुरुषों की प्रतिमाओं की स्थापना का उद्देश्य सामाजिक एकता को मजबूत करना और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देना है, ताकि वे समानता और भाईचारे के मूल्यों को आत्मसात कर सकें।
ग्रामीणों ने सराहा प्रयास
कार्यक्रम में श्याम जी सिंह, मून्नू सिंह, राकेश सिंह, अरविंद कुमार, सोनू सिंह, बिक्कू सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया।

