10 साल की सेवा पर स्थायित्व: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अनुदेशक हुए मजबूत

शहाबगंज। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशकों को नियमित माने जाने और ₹17,000 मासिक मानदेय दिए जाने के फैसले से क्षेत्र के अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस ऐतिहासिक निर्णय को अनुदेशकों के लंबे संघर्ष की बड़ी जीत माना जा रहा है।
अनुदेशक संघ के वाराणसी मंडल अध्यक्ष विकास यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों की नौकरी अब समाप्त नहीं की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट किया है कि संविदा की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अनुदेशकों की सेवाएं स्वतः समाप्त नहीं मानी जाएंगी। लगातार दस वर्षों से कार्यरत रहने के कारण यह पद स्वतः सृजित माना जाएगा।
अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष अभिनव सिंह ने कहा कि ₹17,000 मासिक मानदेय मिलने से अनुदेशक आर्थिक रूप से सशक्त होंगे। नियमित माने जाने के बाद उनका भविष्य सुरक्षित होगा और वे पूरी निष्ठा से शिक्षा कार्य कर सकेंगे। यह फैसला वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं दे रहे अनुदेशकों को स्थायित्व और सम्मान प्रदान करेगा।
गौरतलब है कि अनुदेशक वर्ष 2013 से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इस संबंध में दायर याचिका पर पहले हाईकोर्ट ने अनुदेशकों के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसे राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका खारिज करते हुए अनुदेशकों के पक्ष में अंतिम फैसला सुनाया है।
फैसले की खबर मिलते ही क्षेत्र के अनुदेशकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।

