नहर में उगे केले के पौधे बने ‘सबूत’, टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी

शहाबगंज (चंदौली)।
लेहरा साख नहर की सफाई को लेकर सिंचाई विभाग के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। मनकपड़ा गांव से लेकर केराय गांव तक करीब छह किलोमीटर लंबी नहर की सफाई शैलेश कंस्ट्रक्शन द्वारा कराए जाने का दावा किया गया है, जिस पर 2 लाख 86 हजार रुपये खर्च दर्शाए गए हैं।

नहर में उगे केले के पौधे, सफाई पर सवाल
जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नहर की तलहटी और किनारों पर केले के पौधे, झाड़-झंखाड़ और मोटी गाद अब भी जमी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तविक रूप से सफाई कराई गई होती तो नहर के भीतर इस तरह पौधों का उगना संभव नहीं था। इससे स्पष्ट है कि कार्य महज औपचारिकता तक सीमित रहा और कागजों में ही पूरा दिखा दिया गया।
टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी, किसान नाराज
सफाई अधूरी रहने के कारण कई स्थानों पर पानी का बहाव बाधित है। नहर के टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, जिससे सिंचाई पर निर्भर किसानों में रोष है। किसानों ने आरोप लगाया कि हर वर्ष सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो पाती।
मिलीभगत की आशंका, जांच की मांग
ग्रामीणों ने ठेकेदार और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन की बंदरबांट की आशंका जताई है।
बोले अधिकारी
सिंचाई विभाग के एसडीओ राकेश तिवारी ने कहा कि यदि नहर में केले के पौधे हैं तो जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
किसानों की मांग
किसानों ने उच्चाधिकारियों से स्थलीय निरीक्षण कराकर वास्तविक सफाई कराने की मांग की है, ताकि किसानों को समय पर सिंचाई का लाभ मिल सके।

