मस्जिदों में तरावीह की रौनक, इलाकों में सामूहिक इफ्तार अमन-चैन की दुआओं से गूंज रहा जनपद,
रिपोर्ट मनोज सिंह, चंदौली : इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र और बरकतों वाला महीना रमज़ान पूरे अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जा रहा है। क्षेत्र की मस्जिदों में पांचों वक्त की नमाज़ के साथ तरावीह की विशेष नमाज़ अदा की जा रही है। रोज़ेदार दिन भर रोज़ा रखकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हैं और शाम को इफ्तार के समय खजूर और पानी से रोज़ा खोलते हैं। घरों और मस्जिदों में तिलावत-ए-क़ुरआन, दुआ और ज़िक्र का रूहानी माहौल बना हुआ है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार रमज़ान को तीन अशरों (दस-दस दिनों के हिस्सों) में बांटा गया है और हर अशरे की अपनी अलग अहमियत है। पहला अशरा रहमत का माना जाता है, जिसमें अल्लाह की खास रहमत बंदों पर नाज़िल होती है और लोग ज्यादा से ज्यादा इबादत व नेक कामों में हिस्सा लेते हैं। दूसरा अशरा मग़फ़िरत का होता है, जो गुनाहों की माफी और तौबा का समय है—इन दिनों मस्जिदों में इबादत का उत्साह और बढ़ जाता है। तीसरा और आखिरी अशरा निजात का कहलाता है, जिसे जहन्नम से छुटकारे का समय माना गया है। इसी अशरे में शब-ए-क़द्र की पवित्र रात आती है, जिसे हजार महीनों से बेहतर बताया गया है और जिसकी इबादत का विशेष महत्व है।
हाफिज मुमताज आलम ने बताया कि रमज़ान सिर्फ रोज़ा रखने का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सब्र, त्याग और इंसानियत की भावना को मजबूत करने का महीना है। इस दौरान ज़कात और सदक़ा देना, जरूरतमंदों की मदद करना और गरीबों को इफ्तार कराना सबसे बड़ा नेक काम माना गया है।
कसाब मुहाल, मुस्लिम मुहाल, इस्लामपुर, अलीनगर सहित मुगलसराय के विभिन्न इलाकों में सामूहिक इफ्तार के आयोजन हो रहे हैं, जहां लोग मिल-जुलकर रोज़ा खोलते हैं और अमन-चैन की दुआ करते हैं। रोज़ेदारों का कहना है कि रमज़ान हमें बुराइयों से दूर रहकर अच्छे रास्ते पर चलने और समाज में प्रेम व सद्भाव का संदेश देने की प्रेरणा देता है।




