चकिया

गोवंश बरामदगी के बीच ‘खास रिश्तों’ की कहानी फिर चर्चा में

मु0अ0सं0 11/2026 में 10 गोवंश बरामदगी का दावा, मगर इलाके में चर्चा 12 की—दो गोवंश बिना लिखा-पढ़ी किसके भरोसे पहुंचे?

चन्दौली/इलिया : थाना इलिया पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 11/2026, धारा 3/5ए/8 गोवध निवारण अधिनियम व धारा 3(5) बीएनएस के तहत दर्ज मामले में 19 फरवरी 2026 को जारी प्रेस नोट में 10 राशि गोवंश बरामद कर 4 अंतरराज्यीय पशु तस्करों की गिरफ्तारी का दावा किया गया है। यह कार्रवाई उस समय की बताई जा रही है जब थाना इलिया की कमान तत्कालीन थानाध्यक्ष के पास थी।

पहले भी उठते रहे हैं ऐसे सवाल

इलाके के लोगों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं बताया जा रहा। चर्चा यह भी है कि पहले भी थाना इलिया क्षेत्र और सिहर पहाड़ी से पकड़े गए कुछ गोवंश वसीम इदरीशी के हवाले किए जाने की बातें सामने आती रही हैं, जबकि थाने के रिकॉर्ड में इसकी कोई स्पष्ट लिखा-पढ़ी नहीं बताई जाती।
इतना ही नहीं, पचपरा, रोहाखी और घोड़सारी क्षेत्र से भी कई बार पैदल हांककर ले जाए जा रहे गोवंशों व तस्करों को पकड़े जाने की घटनाएं सामने आईं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उन मामलों में भी कई बार गोवंश बिना किसी लिखित प्रक्रिया के ही वसीम के हवाले कर दिए जाते थे।
ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब नियम गोवंश को गोशाला भेजने या अदालत के आदेश से सुपुर्दगी देने का है, तो फिर यह “अनौपचारिक सुपुर्दगी” आखिर किस व्यवस्था के तहत हो रही है?

गोवंश बरामदगी के साथ ‘खास रिश्तों’ की चर्चा

नवागत थानाध्यक्ष के आने के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

इलिया थाने के आसपास इन दिनों एक और चर्चा भी तेज है। वही वसीम इदरीशी, जिसका नाम गोवंश सुपुर्दगी को लेकर चर्चाओं में लिया जा रहा है, उसका नाम हाल ही में मु0अ0सं0 13/2026, धारा 11 पशु क्रूरता अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे में भी सामने आया है।
बताया जाता है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष के स्थानांतरण के बाद जैसे ही नवागत थानाध्यक्ष चन्दन राय ने कार्यभार संभाला, उसी दौरान वसीम इदरीशी के खिलाफ यह मुकदमा दर्ज किया गया। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में लोग यह भी चर्चा करते नजर आ रहे हैं कि जो नाम पहले केवल चर्चाओं में था, वह अब मुकदमे में भी सामने आने लगा है।

नियम और व्यवस्था पर भी सवाल

आखिर जाता कहां है गोवंश?

अब सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि वसीम इदरीशी को दिए जाने की चर्चा वाले इन गोवंशों का बाद में क्या होता है। क्या वे वास्तव में संरक्षण में रहते हैं, या फिर इसके पीछे कोई और व्यवस्था काम करती है—यह भी जांच का विषय बनता जा रहा है।

सवाल जो जवाब मांगते हैं

अब इलाके में लोग खुले तौर पर कुछ सवाल पूछ रहे हैं—
अगर मौके से 12 गोवंश पकड़े गए थे, तो रिकॉर्ड में 10 ही क्यों?
अगर किसी को गोवंश दिया गया, तो उसकी लिखित सुपुर्दगी कहां है?
पचपरा, रोहाखी और घोड़सारी क्षेत्र में पकड़े गए गोवंशों को भी कई बार उसी व्यक्ति के हवाले किए जाने की चर्चा क्यों होती रही?
और सबसे बड़ा सवाल—आखिर इलिया पुलिस और वसीम के बीच ऐसा क्या खास रिश्ता रहा कि बिना लिखा-पढ़ी के ही जानवर उसके हवाले कर दिए जाते रहे?
इन सवालों के बीच मु0अ0सं0 11/2026 की यह कार्रवाई अब सिर्फ बरामदगी की खबर नहीं रह गई है, बल्कि इलाके में गोवंश बरामदगी और “खास रिश्तों” की कहानी का नया अध्याय बनती जा रही है। अब देखना यह होगा कि इन चर्चाओं का संज्ञान लेकर उच्च अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कराते हैं या फिर यह मामला भी इलिया की चर्चाओं तक ही सीमित रह जाता है।
इस संबंध में जब क्षेत्राधिकारी चकिया रघुराज से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।

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