अधिकारियों के बिना ही निपट गई बरहुआ गांव की मेगा चौपाल, ग्रामीणों ने कहा यह तो सिर्फ कोरमपूर्ति
शहाबगंज चंदौली। विकास खंड क्षेत्र के बरहुआ गांव में शुक्रवार को आयोजित मेगा चौपाल कार्यक्रम अपेक्षाओं के विपरीत महज औपचारिकता बनकर रह गया। कार्यक्रम में जिले व तहसील, ब्लॉक के किसी जिम्मेदार अधिकारी के न पहुंचने से ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना था कि जब अधिकारियों को आना ही नहीं था तो मेगा चौपाल लगाने का क्या औचित्य रह जाता है। लोगों को उम्मीद थी कि मेगा चौपाल के माध्यम से उनकी समस्याओं को सुना जाएगा और उनका समाधान भी किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
चौपाल की ग्राम प्रधान ने कराई थी पूरी व्यवस्था
मेगा चौपाल को लेकर गांव में पहले से तैयारी की गई थी। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मनोज सिंह द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र परिसर में टेंट और कुर्सियों की विधिवत व्यवस्था कराई गई थी। इतना ही नहीं नाश्ते पानी की भी व्यवस्था थी ताकि गांव के लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रख सकें। ग्रामीणों को बताया गया था कि जिले व तहसील के अधिकारी कार्यक्रम में पहुंचेंगे और विभिन्न योजनाओं से संबंधित समस्याओं का समाधान करेंगे। इसी उम्मीद में गांव के काफी लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, लेकिन कार्यक्रम में अपेक्षित अधिकारी नहीं आए।
केवल ब्लॉक स्तर के एक दो कर्मचारी रहे मौजूद
मेगा चौपाल में ब्लॉक स्तर से केवल सचिव साहब सिंह, एडीओ समाज कल्याण पंकज और क्षेत्रीय लेखपाल ही मौजूद रहे। जबकि इस प्रकार के कार्यक्रमों में अक्सर जिले के वरिष्ठ अधिकारी जैसे जिलाधिकारी,मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) या जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) के आने की संभावना रहती है। लेकिन किसी भी बड़े अधिकारी के न पहुंचने से ग्रामीणों को निराशा हाथ लगी। इतना ही नहीं ब्लॉक से खंड विकास अधिकारी वह ऑडियो पंचायत के न पहुंचने की चर्चा भी खुब थी। जिससे कार्यक्रम औपचारिकता तक सीमित रह गया।
राजनीतिक मंच जैसा दिखा कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान एक राजनीतिक दल के नेता ने मंच संभाल लिया और लोगों को संबोधित करते हुए सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई ग्रामीणों को अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा। इससे कुछ देर के लिए कार्यक्रम का माहौल राजनीतिक मंच जैसा बन गया।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
मेगा चौपाल में पहुंचे ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार द्वारा गांव-गांव मेगा चौपाल लगाकर समस्याओं के समाधान की बात कही जाती है, लेकिन हकीकत में यह कार्यक्रम सिर्फ कोरमपूर्ति बनकर रह गया है। ग्रामीणों का कहना था कि जब जिले तहसील व ब्लॉक के अधिकारी ही नहीं पहुंचते हैं तो उनकी समस्याएं आखिर कौन सुनेगा।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में गांवों की समस्याओं को लेकर गंभीर है तो अधिकारियों को गांव में पहुंचकर लोगों की बात सुननी चाहिए। अन्यथा ऐसे कार्यक्रमों का कोई औचित्य नहीं रह जाता और लोगों का भरोसा भी प्रशासनिक व्यवस्था से उठने लगता है।




