रबी सीजन में 1.15 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती का लक्ष्य, विशेषज्ञों ने जताई उत्पादन घटने की आशंका,
रिपोर्ट मनोज सिंह, चंदौली। जनपद में ठंड का असर धीरे-धीरे कम होने लगा है और दिन के तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौसम में यह बदलाव गेहूं की फसल के लिए चिंता का कारण बन सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में तापमान में और वृद्धि होती है तथा तेज हवा चलती है तो इसका सीधा असर गेहूं की फसल पर पड़ेगा। इससे बालियां कमजोर पड़ सकती हैं और उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका है।
कृषि प्रधान जनपद चंदौली में रबी के चालू सीजन में कृषि विभाग की ओर से 1,15,037 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग ने इस सीजन में 381.745 टन उत्पादन और 33.18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता का लक्ष्य रखा है। वर्तमान समय में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जौ, चना, मसूर, अरहर और सरसों के साथ-साथ गेहूं की खेती अपने चरम पर है। अधिकांश खेतों में गेहूं की फसल में बालियां निकल चुकी हैं और किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं।
हालांकि करीब एक सप्ताह पहले तक मौसम गेहूं की फसल के लिए पूरी तरह अनुकूल बना हुआ था, लेकिन पिछले तीन दिनों से सुबह और शाम की ठंड में कमी आई है। वहीं दिन के तापमान में लगभग तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तेज धूप के कारण दिन में गर्मी का अहसास होने लगा है और लोग पसीना महसूस करने लगे हैं। मौसम में आए इस बदलाव को देखते हुए किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल के लिए मध्यम तापमान सबसे अनुकूल माना जाता है। यदि इस समय तापमान तेजी से बढ़ता है तो फसल की बालियां कमजोर हो सकती हैं और दाने ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाते। इससे गेहूं की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। यदि तेज हवा भी चली तो बालियां जल्दी सूखने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे पैदावार में गिरावट आ सकती है।
विशेषज्ञों की राय
कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी डा. अभयदीप गौतम ने बताया कि जनपद में इस बार गेहूं की बोआई कुछ स्थानों पर विलंब से हुई है। फिलहाल सुबह और शाम का तापमान फसल के लिए अनुकूल बना हुआ है, लेकिन यदि आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होती है तो इसका फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि तापमान अधिक होने पर दाने कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।
वहीं जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने भी बताया कि तापमान में वृद्धि होने पर गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे उत्पादन में कमी आने की आशंका रहती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मौसम के अनुसार फसल की निगरानी करते रहें और आवश्यक कृषि प्रबंधन अपनाएं, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।




