एनएमएस में महिला की फोटो, मस्ट्रोल में पुरुष का नाम; फेस बेस्ड मॉनिटरिंग के बावजूद फर्जीवाड़े का शक, फरवरी 2025 के बाद लागू सिस्टम पर भी सवाल
पूरा मामला: कागज और जमीन पर अलग कहानी
चन्दौली : जनपद के शहाबगंज विकास खण्ड अंतर्गत रोहाखी गांव में मनरेगा कार्य में बड़ी अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां “शिवाजी के खेत से गंदा नाला तक मार्जिनल बैंड पर मिट्टी कार्य” कराया जा रहा है, जिसका आईडी संख्या 3171008005/LD/958486255824875144 है।
इस कार्य में मस्ट्रोल के अनुसार करीब 124–128 मजदूरों के काम करने का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत और ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आ रहा है।
महिला की फोटो, नाम पुरुष का—एनएमएस में गड़बड़ी उजागर

जांच में सामने आया कि नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम पर अपलोड की गई तस्वीरों और मस्टर रोल में दर्ज नामों में मेल नहीं है।
मस्ट्रोल संख्या 37 में क्रम संख्या 5 पर UP-71-008-005-001/142 – NAVEEN (M) दर्ज है, जबकि अपलोड फोटो महिला की दिखाई दे रही है। वहीं मस्ट्रोल संख्या 40 में क्रम संख्या 9 पर UP-71-008-005-001/210 – GOVIND (M) दर्ज है, लेकिन फोटो फिर महिला की अपलोड की गई है।
यह गड़बड़ी केवल एक-दो मामलों तक सीमित नहीं बताई जा रही, बल्कि कई एंट्री में इसी तरह की अनियमितता की आशंका है।
फर्जी उपस्थिति और भुगतान का शक

ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन पर कम मजदूर काम कर रहे हैं, जबकि मस्टर रोल में संख्या ज्यादा दिखाई जा रही है।
इससे यह शक गहराता है कि फर्जी उपस्थिति दर्ज कर मजदूरी भुगतान निकाला जा रहा है।
जियो-टैगिंग और NMS सिस्टम पर भी सवाल
गौरतलब है कि फरवरी 2025 से मनरेगा में जियो-टैगिंग और फेस बेस्ड एनएमएस सिस्टम लागू किया गया था, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके।
लेकिन रोहाखी का मामला दिखाता है कि—सिस्टम लागू होने के बावजूद फोटो और नाम में मेल नहीं
और निगरानी में गंभीर चूक हो रही है
पहले भी सामने आ चुका है मामला
बताया जा रहा है कि इससे पहले शहाबगंज ब्लॉक के बयापुर गांव में भी इसी तरह की अनियमितता सामने आई थी।
अब रोहाखी में दोबारा ऐसी गड़बड़ी मिलने से पूरे ब्लॉक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
रोजगार सेवक पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि NMS पर फोटो अपलोड करने की जिम्मेदारी निभाने वाले रोजगार सेवक दिनेश गुप्ता द्वारा ही यह गड़बड़ी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पूर्व में भी इनके कार्यों को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, पहले भी एक ही कार्य पर जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत से भुगतान लेने जैसे गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और मजबूत होती है। इतना ही नहीं, कई अन्य कार्यों में भी रिकॉर्ड और भुगतान को लेकर अनियमितताओं की चर्चाएं क्षेत्र में पहले से होती रही हैं।
ऐसे में स्थानीय स्तर पर इस पूरे प्रकरण को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है और लोगों के बीच यह चर्चा है कि इस तरह की गड़बड़ियों से सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मस्ट्रोल और एनएमएस डेटा का मिलान कराया जाए
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ,वास्तविक मजदूरों को ही भुगतान सुनिश्चित किया जाए
चन्दौली एक्सप्रेस की अपील
यह मामला सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता से जुड़ा है।
प्रशासन को चाहिए कि वह निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए, ताकि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में गरीबों का हक सुरक्षित रह सके।




