विरोध के बीच ताबड़तोड़ कार्रवाई
पांच जेसीबी, भारी पुलिस बल और प्रशासनिक सख्ती—जंगल विभाग का साफ संदेश: अब बख्शे नहीं जाएंगे कब्जेदार
शहाबगंज चंदौली: जिले में वन भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ जंगल विभाग ने निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को रसिया बनवासी बस्ती में करीब 20 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया। सुबह से ही वन विभाग, राजस्व टीम और पुलिस बल की संयुक्त कार्रवाई ने इलाके में हलचल मचा दी। पांच जेसीबी मशीनों के साथ पूरा अमला मौके पर पहुंचा और चिन्हित अतिक्रमण को ध्वस्त करना शुरू कर दिया।

जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, बस्ती में रह रहे अतिक्रमणकारियों ने विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने जेसीबी के आगे खड़े होकर काम रुकवाने की कोशिश की, तो कुछ ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। स्थिति को देखते हुए मौके पर पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसने मोर्चा संभालते हुए किसी भी अप्रिय स्थिति को पैदा नहीं होने दिया। प्रशासन की सख्ती के आगे आखिरकार विरोध कमजोर पड़ गया और कार्रवाई लगातार जारी रही।

सूत्रों के मुताबिक, रसिया बनवासी बस्ती में लंबे समय से वन भूमि पर अवैध कब्जा कर झोपड़ियां और अस्थायी निर्माण कर लिए गए थे। कई बार नोटिस देने और चेतावनी के बावजूद कब्जेदारों ने जमीन खाली नहीं की, जिसके बाद विभाग को सख्त कदम उठाना पड़ा। इस बार विभाग ने पूरी तैयारी के साथ अभियान चलाया, ताकि किसी भी तरह की बाधा को तुरंत खत्म किया जा सके।
अभियान के दौरान जेसीबी मशीनों ने एक-एक कर अवैध झोपड़ियों, टीनशेड और अन्य निर्माणों को जमींदोज कर दिया। देखते ही देखते वर्षों से कब्जाई गई जमीन खाली होने लगी। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह जमीन संरक्षित वन क्षेत्र में आती है और यहां किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह अवैध है।
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि “सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है, उन्हें पहले ही पर्याप्त समय और नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद जमीन खाली नहीं की गई, इसलिए यह कार्रवाई जरूरी हो गई।”

इस पूरे अभियान को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। पुलिस बल के साथ-साथ राजस्व विभाग के कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे, ताकि किसी भी तरह के विवाद या कानूनी अड़चन को तुरंत सुलझाया जा सके। अधिकारियों ने ड्रोन और जियो-टैगिंग के जरिए पूरे क्षेत्र का रिकॉर्ड भी तैयार कराया, जिससे भविष्य में दोबारा अतिक्रमण की संभावना को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां कुछ लोगों ने इसे कानून व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से जरूरी कदम बताया, वहीं प्रभावित परिवारों ने अपनी बेदखली को लेकर नाराजगी जताई। कई परिवारों का कहना था कि वे वर्षों से यहां रह रहे थे और अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की गई है और किसी के साथ अन्याय नहीं हुआ है। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य इलाकों में भी इसी तरह का अभियान चलाया जाएगा, जहां वन भूमि पर कब्जे की शिकायतें मिली हैं।
रसिया बनवासी बस्ती में हुई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन का रुख बेहद सख्त हो चुका है। बुलडोजर की यह गूंज केवल एक बस्ती तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि पूरे जिले में अतिक्रमणकारियों के लिए चेतावनी बन चुकी है। इस दौरान थानाध्यक्ष प्रियंका सिंह, एस आई रामचंद्र साही,अंगद सिंह,रेंजर चकिया अश्वनी कुमार चौबे , रेंजर चंद्रप्रभा अखिलेश द्विवेदी, डिप्टी रेंजर चकिया आनंद दुबे, बन दरोगा राम आशीष,यशवंत सिंह,अमित यादव ,राजकुमार, रामचंद्र शाही ,अंगद सिंह, जागृति यादव , सावित्री अनीता सुरेंद्र कुमार राव मंजू देवी सहित चकिया रेंज, चंद्रप्रभा रेंज, जय मोहनी रेंज, मजगाई रेंज, नौगढ़ रेंज के समस्त बनकर्मी मौजूद रहे।
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