पूर्व बैंक कर्मचारी ने 300 से अधिक खाते खुलवाए, चार खातों से जुड़ी 18 साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आईं
चंदौली एक्सप्रेस
चंदौली। धानापुर थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों में पूर्व बैंक कर्मचारी रोहित कुमार उर्फ काला भी शामिल है। उसने बैंक में नौकरी के दौरान करीब 300 बैंक खाते खुलवाए थे। पुलिस अब इन सभी खातों की साइबर अपराध में संलिप्तता की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में चार खातों के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर 18 अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड की शिकायतें सामने आई हैं। इन शिकायतों में करीब 2.50 लाख रुपये की ठगी की जानकारी मिली है।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह गरीब ग्रामीणों को प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके जीरो बैलेंस बैंक खाते खुलवाता था। खाता खुलने के बाद खाताधारकों से एटीएम कार्ड, पासबुक और ओटीपी की जानकारी हासिल कर ली जाती थी। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था। खाते में रकम आने के बाद एटीएम के माध्यम से धनराशि निकालकर गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।
फर्जी वेबसाइट और विज्ञापनों से करते थे ठगी
जांच में सामने आया कि गिरोह प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और भ्रामक ऑनलाइन विज्ञापन तैयार कर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। ठगी गई रकम अलग-अलग राज्यों में संचालित म्यूल बैंक खातों में मंगाई जाती थी। पुलिस के अनुसार गिरोह का नेटवर्क आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा तक फैला होने की जानकारी सामने आई है। मुंबई में बैठे सहयोगियों को भी बैंक खातों की जानकारी भेजे जाने की बात पूछताछ में सामने आई है।
2024 में खुलवाए गए थे खाते
मामले की शुरुआत जनवरी 2024 में हुई घटना से हुई। असना गांव निवासी एहतशामुद्दीन और उनके सहयोगियों ने आरोप लगाया था कि कालीन कारखाने में एक्सिस बैंक के कर्मचारी के रूप में कार्यरत रोहित कुमार और उसके साथी रावण उर्फ शुभम ने विभिन्न सुविधाओं का लालच देकर उनके जीरो बैलेंस खाते खुलवाए थे। पासबुक देने के बाद एटीएम कार्ड देने के नाम पर ओटीपी हासिल कर लिया गया, लेकिन एटीएम कार्ड नहीं दिया गया।
बाद में खाताधारकों के ई-मेल पर बैंक खातों में भारी लेनदेन के संदेश आने लगे। बैंक पहुंचकर जानकारी करने पर उन्हें पता चला कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना खातों से लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए गए हैं। इस संबंध में साइबर क्राइम थाना चंदौली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
चार खातों की जांच में 18 शिकायतें
पुलिस के मुताबिक एनसीआरपी पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों, बैंक लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक एवं भौतिक साक्ष्यों के विश्लेषण के दौरान गिरोह की गतिविधियों का पता चला। वर्तमान में चार बैंक खातों की प्रारंभिक जांच पूरी की गई है। इन खातों के विरुद्ध एनसीआरपी पर 18 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज मिली हैं। शेष करीब 300 खातों की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद अन्य लोगों की संलिप्तता और खातों में हुए लेनदेन के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुखबिर की सूचना पर ओदरा मार्ग से गिरफ्तारी
धानापुर पुलिस के अनुसार शनिवार को मुखबिर की सूचना पर ओदरा मार्ग से दोपहर करीब 12:20 बजे दोनों आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान आशीष विश्वकर्मा पुत्र रमेश विश्वकर्मा, निवासी पसाई, थाना धीना, उम्र करीब 22 वर्ष और रोहित कुमार उर्फ काला पुत्र किशोरी राम, निवासी सेवढ़ी मड़ई, थाना बलुआ, उम्र करीब 31 वर्ष के रूप में हुई। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन, एक कूटरचित आधार कार्ड, एक एटीएम कार्ड और एक चेकबुक बरामद की है।
फर्जी आधार पर बदल लेते थे पहचान
पूछताछ में आशीष विश्वकर्मा ने पुलिस को बताया कि वह रोहित और तीन अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ग्रामीणों को प्रधानमंत्री मुद्रा लोन तथा सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देता था। खाते खुलवाने के बाद एटीएम, पासबुक और ओटीपी का एक्सेस हासिल कर खाते की जानकारी मुंबई स्थित सहयोगियों को भेजी जाती थी। इन खातों में फर्जी लोन वेबसाइट और ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से की गई साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी।
पुलिस के अनुसार जांच से बचने के लिए आशीष दूसरे लोगों के नाम-पते वाले कूटरचित आधार कार्ड पर अपनी फोटो लगाकर उसका इस्तेमाल करता था।
बैंक में नौकरी के दौरान खुलवाए 300 खाते
पूछताछ में रोहित कुमार ने बताया कि वह पूर्व में एक्सिस बैंक सकलडीहा में कर्मचारी था। इसी दौरान उसने करीब 300 बैंक खाते खुलवाए थे। पुलिस के अनुसार बैंक में संदिग्ध गतिविधियों के कारण नौकरी से निकाले जाने के बाद भी उसने बैंकिंग प्रक्रिया के अपने अनुभव का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया। उसने अपने साथियों को वैध रूप से खोले गए बैंक खातों का दुरुपयोग कर साइबर ठगी की रकम मंगाने का तरीका बताया।
पुलिस अब रोहित द्वारा पूर्व में खुलवाए गए करीब 300 बैंक खातों की जांच कर रही है। जांच में यदि अन्य खातों की साइबर अपराध में संलिप्तता सामने आती है तो उनके संबंध में भी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस टीम ने की कार्रवाई
गिरफ्तारी करने वाली टीम में थाना प्रभारी आदर्श सलिल स्वरूप, उपनिरीक्षक गेंदा सिंह, हेड कांस्टेबल राजेश कुमार मौर्या और महिला कांस्टेबल श्वेता सिंह शामिल रहे। साइबर टीम में साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक मिर्जा रिजवान बेग, हेड कांस्टेबल पवन कुमार यादव, कांस्टेबल मनोज चौहान और कांस्टेबल अनिल प्रजापति शामिल रहे।
पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की विवेचना जारी है और जांच के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों तथा बैंक खातों के संबंध में भी कार्रवाई की जाएगी।




