दो अखबारों में आरईडी सहायक अभियंता के रूप में प्रकाशित हुई पहचान, एक्सईएन बोले—हमारे यहां इस नाम का कोई सहायक अभियंता नहीं
चन्दौली एक्सप्रेस शहाबगंज। इलिया-शहाबगंज क्षेत्र के घोड़सारी गांव में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर प्रकाशित खबर के बाद आरईडी के सहायक अभियंता बताए गए रंजन मौर्य की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। दो प्रतिष्ठित अखबारों में प्रकाशित खबर में रंजन मौर्य को आरईडी का सहायक अभियंता बताते हुए कार्यस्थल का निरीक्षण और पैमाइश करने की बात कही गई है। खबर के साथ प्रकाशित तस्वीर में एक व्यक्ति हाथ में डायरी और फीता लेकर मौके की पैमाइश करता भी दिखाई दे रहा है।
बताया गया कि बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर किसान विकास मंच की ओर से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद रंजन मौर्य को कार्यस्थल का निरीक्षण और पैमाइश करने के लिए भेजे जाने की बात खबर में प्रकाशित हुई।
फिर किस हैसियत से हो रही थी पैमाइश?
तस्वीर सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मौके पर पैमाइश करने वाला व्यक्ति आरईडी का सहायक अभियंता नहीं है, तो वह किस पद और किस आदेश के आधार पर सरकारी कार्यस्थल की नापी कर रहा था? तस्वीर में उसके हाथ में डायरी और फीता दिखाई दे रहा है, जबकि आसपास कई ग्रामीण भी मौजूद हैं।
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि रंजन मौर्य द्वारा शहाबगंज विकासखंड में क्षेत्र पंचायत से कराए गए कार्यों की एमबी और कार्यों के सत्यापन से जुड़े कार्य भी किए जाते हैं। ऐसे में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें इस तरह के तकनीकी कार्य करने का अधिकार किस विभाग या अधिकारी ने दिया है।
सरकारी कार्यों की पैमाइश, एमबी और सत्यापन जैसे तकनीकी कार्य अधिकृत व्यवस्था के तहत किए जाते हैं। ऐसे में नियुक्ति और अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यदि संबंधित व्यक्ति को किसी विभाग ने अधिकृत किया है तो उसका आदेश सामने आना चाहिए और यदि नहीं किया गया है तो सरकारी कार्यस्थल पर पैमाइश किए जाने का आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।
अधिशासी अभियंता ने नियुक्ति से किया इनकार
मामले में आरईडी के अधिशासी अभियंता अनिरुद्ध यादव से रंजन मौर्य की नियुक्ति और मौके पर भेजे जाने के संबंध में बात की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “हमारे यहां रंजन मौर्य नाम का कोई सहायक अभियंता नियुक्त नहीं है। न ही मेरे विभाग द्वारा किसी को मौके पर या कार्यस्थल पर निरीक्षण व पैमाइश के लिए भेजा गया था।”
अब सवाल यह है कि फीता लेकर पैमाइश करने वाले व्यक्ति की वास्तविक नियुक्ति क्या है और उसे कार्यस्थल की नापी करने का अधिकार किसने दिया? मामले में संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों के स्पष्टीकरण से ही स्थिति साफ होगी




