फर्जी टेक्निकल सपोर्ट बनकर लेते थे रिमोट एक्सेस, पांच गिरफ्तार; नौ लाख रुपये फ्रीज
चंदौली। जापान में बैठे बुजुर्गों को तकनीकी मदद के नाम पर भरोसे में लेना और फिर उनके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेकर बैंक खातों तक पहुंच बनाने वाले कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का चंदौली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मुगलसराय के कैलाशपुरी में एक बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर चल रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर पर स्वाट, सर्विलांस, साइबर टीम और मुगलसराय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक गिरोह का मुख्य सरगना कार्रवाई से कुछ समय पहले ही मौके से निकल गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस को मौके पर 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, 19 की-बोर्ड, 18 माउस, 18 हेडफोन, तीन लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, कई राउटर व नेटवर्किंग उपकरण और पांच कूटरचित आधार कार्ड मिले। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपित रौनक सिंह के दो बैंक खातों में करीब नौ लाख रुपये भी फ्रीज कराए हैं।
जापानी भाषा सीखकर बुजुर्गों को बनाते थे निशाना
पूछताछ में आरोपितों के हवाले से पुलिस ने बताया कि उन्होंने नालंदा और गया में जापानी भाषा सीखी थी। इसके बाद इंटरनेट आधारित कॉलिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से जापान के नागरिकों से संपर्क किया जाता था। आरोपित खुद को कंप्यूटर या बैंक का तकनीकी सहायता कर्मचारी बताकर पीड़ितों को भरोसे में लेते थे।
पुलिस के मुताबिक पीड़ितों को तकनीकी समस्या का झांसा देकर एक सपोर्ट वेबसाइट खोलने और रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के माध्यम से कनेक्शन देने के लिए कहा जाता था। रिमोट एक्सेस मिलने के बाद आरोपित पीड़ित के कंप्यूटर की गतिविधियों को नियंत्रित कर सकते थे। इसके बाद बैंकिंग ऐप या इंटरनेट बैंकिंग में लॉगिन कराने का प्रयास किया जाता था।
विदेशी नंबर दिखाकर भरोसा, फिर बैंक खाते पर नजर
पुलिस के अनुसार गिरोह इंटरनेट आधारित कॉलिंग के जरिए जापान का नंबर प्रदर्शित करता था और विदेशी नामों का इस्तेमाल कर पीड़ितों का भरोसा जीतता था। आरोपितों के निशाने पर खास तौर पर ऐसे जापानी बुजुर्ग थे, जो तकनीकी रूप से कम परिचित थे और जिनके बैंक खातों में जीवनभर की जमा-पूंजी होने की संभावना रहती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर पीड़ितों से ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर वेबकैम चालू कराया जाता था। पुलिस के अनुसार बरामद सामग्री में कुछ ऐसी तस्वीरें भी मिली हैं, जिनमें बुजुर्ग कैमरे के सामने दिखाई दे रहे हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप में साझा होती थी बैंकिंग जानकारी
पुलिस के मुताबिक पीड़ितों से प्राप्त बैंकिंग विवरण को व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ साझा किया जाता था। इसके बाद रकम दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपित रौनक सिंह के दो बैंक खातों में करीब नौ लाख रुपये फ्रीज कराए हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इससे पहले कितनी रकम की ठगी हुई और पैसा किन-किन बैंक खातों में पहुंचा।
19 मॉनिटर और 20 सीपीयू समेत भारी बरामदगी
कार्रवाई में पुलिस ने 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, 19 की-बोर्ड, 18 माउस और 18 हेडफोन बरामद किए। इसके अलावा तीन लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, तीन वाई-फाई राउटर, टीपी-लिंक राउटर और डी-लिंक स्विच हब भी बरामद किया गया।
पुलिस के अनुसार वाराणसी के पते पर बनाए गए पांच फर्जी/कूटरचित आधार कार्ड भी बरामद हुए हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
मैनेजर समेत पांच गिरफ्तार, मुख्य संचालक फरार
गिरफ्तार आरोपितों में रौनक सिंह (32), निवासी नालंदा, बिहार, को पुलिस ने कॉल सेंटर का मैनेजर बताया है। इसके अलावा रोशन कुमार (21), अमन कुमार (23), अंकित कुमार (25) और विकास वैभव (25), सभी बिहार निवासी, गिरफ्तार किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर का मुख्य संचालक कार्रवाई से कुछ समय पहले ही वहां से निकल गया था। उसकी और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश की जा रही है।
मैनेजर समेत पांच गिरफ्तार, मुख्य संचालक फरार
गिरफ्तार आरोपितों में रौनक सिंह (32), निवासी नालंदा, बिहार, को पुलिस ने कॉल सेंटर का मैनेजर बताया है। इसके अलावा रोशन कुमार (21), अमन कुमार (23), अंकित कुमार (25) और विकास वैभव (25), सभी बिहार निवासी, गिरफ्तार किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर का मुख्य संचालक कार्रवाई से कुछ समय पहले ही वहां से निकल गया था। उसकी और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश की जा रही है।
अब रकम से लेकर विदेशी कनेक्शन तक खंगाल रही पुलिस
पुलिस अब गिरोह के विदेशी कॉलिंग सिस्टम, रिमोट एक्सेस अकाउंट, बैंक खातों, हवाला के जरिए कथित धन हस्तांतरण और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच के बाद पीड़ितों की संख्या और ठगी की कुल रकम के संबंध में और जानकारी सामने आ सकती है।
मामले में मुगलसराय थाने में मु0अ0सं0 510/2026 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66C व 66D में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों के अन्य आपराधिक इतिहास की भी जानकारी जुटाई जा रही है। चंदौली पुलिस की इस कार्रवाई में मुगलसराय पुलिस, स्वाट, सर्विलांस और साइबर टीम के अधिकारियों व कर्मचारियों की संयुक्त भूमिका रही।




