इलिया कस्बा, पतेरी मोड़ और महादाइच बॉर्डर पर बन रहे अंतरराज्यीय गेट; रस्सी के सहारे पोल, फिनिशिंग और सौंदर्यीकरण का काम अधूरा
इलिया। उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा क्षेत्र में चंदौली की पहचान को नया स्वरूप देने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग की ओर से कुल करीब 5.71 करोड़ रुपये की लागत से तीन अंतरराज्यीय प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं। ये प्रवेश द्वार इलिया कस्बा, पतेरी मोड़ और महादाइच बॉर्डर पर तैयार किए जा रहे हैं। परियोजना का उद्देश्य सीमा क्षेत्र में जिले में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए आकर्षक स्वागत स्थल तैयार करने के साथ चंदौली की कला, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को प्रदर्शित करना है।
कुल परियोजना लागत को तीनों प्रवेश द्वारों में बांटने पर औसतन करीब 1.90 करोड़ रुपये प्रति प्रवेश द्वार की लागत बैठती है। हालांकि, तीनों स्थानों की वास्तविक स्वीकृत लागत अलग-अलग होने की स्थिति में विभागीय अभिलेख के अनुसार राशि में अंतर हो सकता है।
पतेरी मोड़ पर दो लाइटें बंद, पोल रस्सी के सहारे
करोड़ों रुपये की इस परियोजना के बीच पतेरी मोड़ के पास बने प्रवेश द्वार पर दो लाइटें बंद हो गई हैं। वहीं एक लाइट का पोल रस्सी के सहारे टिका हुआ दिखाई दे रहा है। इससे निर्माण की गुणवत्ता के साथ ही विद्युत व्यवस्था और पोल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
तकनीकी रूप से किसी विद्युत पोल को रस्सी के सहारे स्थायी रूप से खड़ा रखना उचित व्यवस्था नहीं मानी जा सकती। पोल की मजबूती के लिए उसके फाउंडेशन, एंकरिंग, बेस प्लेट और स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी की जांच जरूरी होती है। सार्वजनिक मार्ग के किनारे होने के कारण विद्युत कनेक्शन, केबल और अर्थिंग की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।
फिनिशिंग और सौंदर्यीकरण का काम भी अधूरा
मौके की तस्वीरों में प्रवेश द्वार पर लिखाई और फिनिशिंग से जुड़े कुछ काम अधूरे दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा गेट के आसपास प्रस्तावित फूल-पौधों और लैंडस्केपिंग से संबंधित कार्य भी पूरा नजर नहीं आता। परिसर की साफ-सफाई की स्थिति भी अपेक्षित स्तर की नहीं दिख रही है।
प्रवेश द्वारों को जिले की पहचान के प्रमुख बिंदु के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऐसे में केवल मुख्य ढांचा खड़ा कर देना पर्याप्त नहीं होगा। फिनिशिंग, पेंटिंग, साइनेज, प्रकाश व्यवस्था, लैंडस्केपिंग, ड्रेनेज और साफ-सफाई जैसे कार्य भी परियोजना के अंतिम स्वरूप का हिस्सा हैं।
तीन गेट, करोड़ों की लागत, गुणवत्ता पर निगाह
इलिया क्षेत्र में तीन स्थानों पर बन रहे इन प्रवेश द्वारों की कुल लागत करीब 5.71 करोड़ रुपये है। औसत लागत के लिहाज से प्रत्येक गेट पर करीब 1.90 करोड़ रुपये की लागत आती है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान सामग्री की गुणवत्ता, विद्युत उपकरणों की स्थापना, पोल की एंकरिंग और फिनिशिंग कार्यों की तकनीकी निगरानी गंभीरता से की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने पतेरी मोड़ पर बंद पड़ी दोनों लाइटों को ठीक कराने, रस्सी के सहारे खड़े पोल को तकनीकी मानकों के अनुसार सुरक्षित कराने और अधूरे फिनिशिंग व सौंदर्यीकरण कार्यों को पूरा कराने की मांग की है।
निर्माण के साथ रखरखाव भी जरूरी
इन प्रवेश द्वारों का निर्माण पूरा होने के बाद नियमित रखरखाव भी जरूरी होगा। लाइट, वायरिंग, पोल, फाउंडेशन, पेंट और सौंदर्यीकरण की समय-समय पर जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई संरचनाएं कुछ ही वर्षों में बदहाल हो सकती हैं। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता के साथ भविष्य के रखरखाव की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है।
अवर अभियंता का फोन नहीं उठा
खराब लाइटों, पोल की स्थिति, फिनिशिंग और अधूरे सौंदर्यीकरण कार्यों के संबंध में लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता पंकज खेमका से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।




