सिपाही सुमित कुमार व अन्य पुलिसकर्मियों पर बेटे को ले जाने का आरोप, अगले दिन थाने पहुंचे पिता को जानकारी नहीं मिलने का दावा
चंदौली। धानापुर थाना क्षेत्र में एक युवक को पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए ले जाने के बाद उसके संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने का मामला सामने आया है। युवक के पुलिस अभिरक्षा से कथित तौर पर फरार होने की चर्चा के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में कस्बा निवासी भरत नाथ मौर्य ने पुलिस अधीक्षक चंदौली को प्रार्थना पत्र देकर अपने पुत्र के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने और मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
10 अक्टूबर की शाम सात बजे बेटे को ले जाने का आरोप
पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, कस्बा निवासी भरत नाथ मौर्य ने आरोप लगाया है कि 10 अक्टूबर 2026 की शाम करीब सात बजे उनके पुत्र रितेश कुमार मौर्य उर्फ सोनू को धानापुर थाने के सिपाही सुमित कुमार व अन्य पुलिसकर्मी पूछताछ के लिए थाने ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गए थे।
पिता ने अपने प्रार्थना पत्र में दावा किया है कि उनके घर के आसपास रहने वाले कई लोगों ने भी उनके बेटे को पुलिसकर्मियों के साथ जाते हुए देखा था। इसके बाद परिवार को उम्मीद थी कि थाने में बेटे के संबंध में जानकारी मिल जाएगी, लेकिन अगले दिन की स्थिति को लेकर पिता ने गंभीर शिकायत की है।
11 अक्टूबर की सुबह से थाने का चक्कर, फिर भी जानकारी नहीं मिलने का आरोप
प्रार्थना पत्र में भरत नाथ मौर्य ने आरोप लगाया है कि 11 अक्टूबर की सुबह से वह कई बार धानापुर थाने में अपने बेटे के बारे में जानकारी लेने पहुंचे। उनका कहना है कि पुलिसकर्मी उनके बेटे को थाने ले जाने की बात से इनकार कर रहे हैं और उन्हें उसके संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
पिता की शिकायत के मुताबिक, एक तरफ उनका बेटा पुलिसकर्मियों के साथ गया था, जिसे आसपास के लोगों द्वारा देखे जाने का दावा किया गया है, वहीं दूसरी तरफ थाने में उसके बारे में जानकारी नहीं मिलने से परिवार परेशान है।
पिता ने जताई अनहोनी की आशंका, पुलिस को ठहराया जिम्मेदार
भरत नाथ मौर्य ने अपने प्रार्थना पत्र में बेटे के साथ किसी अनहोनी की आशंका जताई है। उन्होंने लिखा है कि यदि कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए धानापुर पुलिस जिम्मेदार होगी। पिता ने पुलिस अधीक्षक से अपने बेटे के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने और मदद करने की गुहार लगाई है।
यह शिकायत पुलिस की कार्यप्रणाली और युवक की वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल खड़े करती है। हालांकि, प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पुलिस अभिरक्षा पर सवाल, आखिर युवक कहां है?
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि युवक को पुलिस अपने साथ ले गई थी, तो उसके बाद क्या हुआ? क्या युवक को विधिवत हिरासत में लिया गया था? यदि वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हुआ है, तो घटना किन परिस्थितियों में हुई? क्या इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई?
इन सवालों का जवाब जांच और पुलिस के आधिकारिक पक्ष से ही सामने आ सकेगा। मामले में सिपाही सुमित कुमार व अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
एसपी चंदौली से हस्तक्षेप की मांग
पिता के प्रार्थना पत्र के बाद अब पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक बयान का इंतजार है। युवक की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के साथ ही शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जानी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
चंदौली एक्सप्रेस का सवाल: जब एक पिता अपने बेटे को पुलिसकर्मियों द्वारा ले जाए जाने का आरोप लगाकर अधिकारियों से गुहार लगा रहा है, तो आखिर रितेश कुमार मौर्य उर्फ सोनू की वर्तमान स्थिति क्या है? पुलिस इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर परिजनों की चिंता कब दूर करेगी?




