रंगोत्सव का संदेश: प्रेम, आस्था और विजय का प्रतीक होली
चंदौली। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होली का पर्व भारतीय संस्कृति की जीवंतता, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सत्य की विजय, अहंकार के अंत और प्रेम के विस्तार का संदेश देने वाला पर्व है। ग्रामीण अंचलों से लेकर नगरों तक इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जाता है।
पौराणिक कथा: प्रह्लाद की अटूट भक्ति से होली का संबंध
प्राचीन पौराणिक कथा से जुड़ा है। कथा के अनुसार हिरण्यकशिपु नामक असुर राजा अत्यंत शक्तिशाली था। वह स्वयं को भगवान मानता था और चाहता था कि सभी लोग उसी की पूजा करें। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। पिता के लाख समझाने और डराने के बावजूद प्रह्लाद ने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी।
हिरण्यकशिपु ने क्रोधित होकर प्रह्लाद को मारने के अनेक प्रयास किए—कभी विष दिया गया, कभी ऊंचाई से गिराया , तो कभी हाथियों से कुचलवाने की कोशिश की , किंतु हर बार भगवान विष्णु की कृपा से वह सुरक्षित बच गया।
होलिका दहन: अहंकार का अंत
अंततः हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन वरदान का दुरुपयोग होने के कारण होलिका अग्नि में भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित बच गए।
इसी घटना की स्मृति में प्रत्येक वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में होलिका दहन किया जाता है। लोग अग्नि की परिक्रमा कर बुराइयों को त्यागने और जीवन में सदाचार अपनाने का संकल्प लेते हैं।
रंगों की होली: प्रेम और भाईचारे का उत्सव
होलिका दहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। लोग अबीर-गुलाल से एक-दूसरे को रंगते हैं। गांवों में ढोलक और फाग गीतों की धुन पर होली गाई जाती है। बच्चे पिचकारी से रंगों की बौछार करते हैं, तो बुजुर्ग पारंपरिक गीतों के माध्यम से आनंद व्यक्त करते हैं।
घरों में गुझिया, दही-बड़ा, मालपुआ जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते हैं। यह पर्व सामाजिक समरसता को मजबूत करता है और आपसी वैमनस्य को दूर करने का अवसर देता है।
वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, ऋतु परिवर्तन के समय होली का पर्व शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना गया है। पुराने समय में टेसू (पलाश) के फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार किए जाते थे, जो त्वचा के लिए लाभकारी होते थे। यह पर्व हमें पर्यावरण के अनुकूल रंगों के प्रयोग की भी सीख देता है।
होली पर्व देता है संदेश
होली का पर्व हमें यह सिखाता है कि सत्य और धर्म की राह कठिन जरूर हो सकती है, लेकिन अंततः विजय उसी की होती है। यह त्योहार प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है।
चंदौली जनपद में भी होली को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। गांवों में होलिका दहन स्थल की साफ-सफाई की जा रही है और बाजारों में रंग-गुलाल की दुकानें सज गई हैं।




