इलिया पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल, कस्टडी नियमों के उल्लंघन का आरोप

चंदौली | इलिया थाना
माल्दह पुलिया पर गोवंश तस्करी के मामले में 5 दिसंबर 2025 को हुई गिरफ्तारी के बाद सामने आए घटनाक्रम ने इलिया पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त के मोबाइल से हजारों रुपये का यूपीआई ट्रांजेक्शन होना न सिर्फ नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है, बल्कि पूरे प्रकरण को गंभीर संदेह के घेरे में डाल रहा है।
गिरफ्तारी के बाद कैसे हुआ डिजिटल लेन-देन?
जानकारी के अनुसार अंतरराज्यीय पशु तस्कर नरेन्द्र को 5 दिसंबर 2025 की सुबह 6:31 बजे गिरफ्तार किया गया था।
नियमों के मुताबिक गिरफ्तारी के तुरंत बाद अभियुक्त का मोबाइल सील कर सुरक्षित किया जाना अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद उसी मोबाइल से लगभग दो घंटे बाद यूपीआई ट्रांजेक्शन किए गए।
यूपीआई से 55 हजार भेजे गए – पूरा डिजिटल ब्यौरा

सूत्रों के अनुसार अभियुक्त के मोबाइल से निम्नलिखित ट्रांजेक्शन किए गए—
🔹 सुबह 8:17 बजे
₹50,000
UPI Reference No.:
UPI/142517255820/DR/Jay Pra/Paytm/BARB787079420
🔹 सुबह 8:20 बजे
₹5,000
UPI Reference No.:
UPI/285863613034/DR/Jay Pra/HDFC787079420/Paytm
➡️ कुल राशि: ₹55,000
➡️ जिस खाते में रकम भेजी गई:
“जेपी ऑनलाइन सेवा सीएससी सेंटर, केवां, चैनपुर, जिला कैमूर (भभुआ), बिहार”
मामला उजागर होने के बाद रकम वापस मंगाई गई
यूपीआई ट्रांजेक्शन सामने आने के बाद
दोपहर 12:45 बजे पूरी राशि वापस कराई गई।
🔹 रकम वापसी का यूपीआई विवरण:
₹55,000 (पूर्ण वापसी)
UPI Reference No.: UPI/393306812085/CR/Jay Prakash/SBIN-787079420
इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।
कस्टडी में मोबाइल से ट्रांजेक्शन: सीधा नियम उल्लंघन
विधि विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस अभिरक्षा में रहते हुए अभियुक्त के मोबाइल से इस प्रकार का वित्तीय लेन-देन कस्टडी नियमों का सीधा उल्लंघन है। यदि मोबाइल अभियुक्त के पास था → गंभीर लापरवाही
यदि मोबाइल पुलिस के कब्जे में था और उससे ट्रांजेक्शन हुआ → गंभीर कदाचार
दोनों ही स्थितियों में जवाबदेही तय होना आवश्यक माना जा रहा है।
तीन पुलिस कर्मियों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में इलिया थाने में तैनात—
रामसूरत चौहान, आलोक सिंह, महेश यादव की भूमिका संदिग्ध रही है। आरोप है कि पशु तस्करों से अवैध वसूली के लिए यूपीआई के जरिए रकम मंगाई जाती है और बाद में उसे नगद में बदलकर बांट लिया जाता है।
जमा तलाशी में मिली नकदी भी सवालों के घेरे में बताया जा रहा है कि अभियुक्त की जमा तलाशी के दौरान उसके पास से
25 से 30 हजार रुपये नकद भी बरामद हुए थे।
आरोप है कि इस रकम को नियमानुसार मालखाने में जमा न कर आपस में बांट लिया गया, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग
दिनदहाड़े गोवंश लदी गाड़ियों का सीमापार आवागमन और अब हिरासत में अभियुक्त के मोबाइल से
UPI/142517255820
UPI/285863613034
UPI/393306812085
जैसे ट्रांजेक्शन सामने आने के बाद पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्षेत्र में मांग उठ रही है कि पूरे मामले की स्वतंत्र व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके—
गिरफ्तारी के बाद मोबाइल से लेन-देन कैसे हुआ यूपीआई ट्रांजेक्शन किसके कहने पर कराया गया
रकम वापस क्यों मंगाई गई और जमा तलाशी की नकदी का आखिर क्या हुआ बिना निष्पक्ष जांच के इन सवालों का जवाब मिलना कठिन माना जा रहा है।

