भारत माला सप्लाई के नाम पर सैकड़ों ओवरलोड ट्रक, जिम्मेदार विभाग बने मूकदर्शक
इलिया चन्दौली एक्सप्रेस। बिहार जाने वाले मुख्य मार्ग पर मालदह गांव के समीप गुरुवार को नहर किनारे बनी सड़क पर गिट्टी लदी एक ट्रक धंस गई। देखते ही देखते सड़क जाम में बदल गई और घंटों तक आवागमन बाधित रहा। सुबह से ही ओवरलोड ट्रकों की लंबी कतार लग गई, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और कामकाजी लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। घटना ने कमजोर सड़कों और पुराने पुलों पर दौड़ रहे भारी वाहनों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नहर पटरी सड़क पहले से जर्जर, फिर भी दौड़ रहे भारी ट्रक

स्थानीय लोगों के अनुसार नहर पटरी की सड़क लंबे समय से बदहाल है। कई बार शिकायतें और खबरें प्रकाशित होने के बावजूद मरम्मत की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया। गुरुवार सुबह गिट्टी से लदा ओवरलोड ट्रक सड़क पर धंस गया और पीछे दर्जनों ट्रक फंस गए। कई घंटे तक पूरा मार्ग जाम की गिरफ्त में रहा।
भारत माला और बिहार निर्माण कार्य बना ओवरलोडिंग का ‘पास’ ?
अहरौरा क्षेत्र से गिट्टी और मोरंग की बड़े पैमाने पर सप्लाई भारत माला परियोजना और बिहार प्रांत में चल रहे सड़क निर्माण व नहरों के सिल्ट पीचिंग कार्यों के लिए की जा रही है। आरोप है कि इसी सप्लाई के नाम पर प्रतिदिन सैकड़ों ओवरलोड ट्रक मंगरौर पुल से होकर सैदुपुर मार्केट और मालदह मार्ग के रास्ते बिहार की ओर रवाना हो रहे हैं।
ग्रामीण सड़कों से लेकर आबादी क्षेत्र तक भारी वाहनों की आवाजाही ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नजर शायद अभी तक इन ट्रकों तक नहीं पहुंची है।
सैदूपुर मार्केट : बाजार कम, ट्रकों का कॉरिडोर ज्यादा
सैदूपुर मार्केट की आबादी क्षेत्र की सड़क दिन-रात भारी वाहनों के दबाव में कराह रही है। संकरी सड़क से गुजरते ओवरलोड ट्रकों के कारण जाम, धूल और दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है। व्यापारियों का कहना है कि बाजार क्षेत्र अब आम लोगों से ज्यादा ट्रकों के लिए सुरक्षित दिख रहा है।
अस्सी के दशक का मंगरौर पुल भी झेल रहा दबाव
चिंता का विषय मंगरौर पुल भी है, जो अस्सी के दशक में बनाया गया था। समय के साथ पुल पुराना हो चुका है, लेकिन आज भी भारी और ओवरलोड वाहनों की कतारें बिना रोकटोक गुजर रही हैं। पुल की वास्तविक भार क्षमता क्या है और आखिरी बार सुरक्षा जांच कब हुई, इसका कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि कहीं जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार तो नहीं कर रहे।
जिम्मेदारी किसकी? विभाग एक-दूसरे की ओर इशारा
खनन विभाग खनिज परिवहन देखता है, परिवहन विभाग ओवरलोडिंग रोकने का जिम्मेदार है और पुलिस यातायात व्यवस्था संभालती है। लेकिन जमीन पर स्थिति यह है कि ओवरलोड वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं। लोग तंज कस रहे हैं कि शायद कार्रवाई का समय अभी नहीं आया है या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी का जवाब भी ‘ड्यूटी मोड’ में
सड़क और पुल की स्थिति को लेकर पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता पंकज खेमखा से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि वह एसआईआर ड्यूटी में व्यस्त हैं। विभागीय जानकारी के लिए सुजीत विश्वकर्मा से बात करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “वो लोग ऑफिस में बैठे रहते हैं, उनसे बात कर लीजिए, उन लोगों को कोई काम नहीं रहता है।” अधिकारी के इस बयान ने विभागीय समन्वय और जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
सिंचाई विभाग का आरोप : लगाया बैरियर, पुलिस मिलीभगत से हटाया गया
सिंचाई विभाग के एसडीओ राकेश तिवारी ने कहा कि नहर किनारे बनने वाली सड़कें हल्के लोड, अधिकतम ट्रैक्टर संचालन के लिए बनाई जाती हैं। भारी वाहनों के संचालन के लिए इनका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पूर्व में विभाग की ओर से नहर पटरी मार्ग पर लोहे का बैरियर लगाया गया था, लेकिन पुलिस की मिलीभगत से उसे उखाड़ कर फेंक दिया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में थाना पुलिस और भारत माला परियोजना को भी पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
लोगों की मांग : हादसे से पहले जागे प्रशासन
ग्रामीणों और व्यापारियों ने प्रशासन से नहर पटरी सड़क की तत्काल मरम्मत कराने, सैदुपुर बाजार क्षेत्र में भारी वाहनों के संचालन पर नियंत्रण लगाने और मंगरौरा पुल की तकनीकी जांच कर उसकी भार क्षमता सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

