वर्षों से निभा रहे मानवीय संवेदना का रिश्ता
रिपोर्ट मनोज सिंह, चकिया (चंदौली)। आज के दौर में जहां इंसान अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ में उलझता जा रहा है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी संवेदनशीलता और करुणा के माध्यम से समाज के सामने इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। चकिया नगर निवासी प्रदीप उपाध्याय उन्हीं लोगों में से एक हैं, जो कई वर्षों से बेजुबान बंदरों और लंगूरों के बीच समय बिताकर उनके प्रति अपने प्रेम और जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।
रोजाना करते हैं भोजन और पानी की व्यवस्था

प्रदीप उपाध्याय का यह कार्य कोई एक दिन का नहीं, बल्कि कई वर्षों से निरंतर चल रहा एक मानवीय प्रयास है। वह प्रतिदिन सुबह और शाम तय समय पर उन स्थानों पर पहुंचते हैं जहां बंदरों और लंगूरों का झुंड रहता है। वहां पहुंचकर वह इन बेजुबान जीवों को फल, बिस्किट, चना और अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं।
गर्मी के मौसम में वह इनके लिए पानी की भी व्यवस्था करते हैं ताकि इन जीवों को भोजन और पानी के लिए भटकना न पड़े। उनके इस प्रयास को देखकर आसपास के लोग भी प्रभावित होते हैं और कई लोग अब पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने लगे हैं।
बेजुबान जीवों से जुड़ाव से मिलता है मानसिक सुकून
प्रदीप उपाध्याय का कहना है कि आज का इंसान अपनी व्यस्त जिंदगी में इतना उलझ गया है कि उसे अपने अलावा किसी और की चिंता नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि यह बेजुबान जीव भी इसी प्रकृति का हिस्सा हैं और इस धरती पर उनका भी उतना ही अधिकार है जितना मनुष्य का।
उन्होंने बताया कि जब वह बंदरों और लंगूरों के बीच बैठकर उन्हें भोजन कराते हैं तो उन्हें मानसिक शांति और सुकून का अनुभव होता है। उनके अनुसार इन जीवों के बीच समय बिताने से मन शांत होता है और इंसान के भीतर दया और करुणा की भावना भी बढ़ती है।
समाज के लिए बन रही प्रेरणा
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदीप का यह कार्य समाज के लिए प्रेरणादायक है। आज के समय में जब संवेदनशीलता धीरे-धीरे कम होती जा रही है, ऐसे में उनका यह प्रयास यह संदेश देता है कि इंसानियत केवल इंसानों तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी जीव-जंतुओं के प्रति दया और करुणा का भाव होना चाहिए।
समाज में बढ़ती संवेदनहीनता के दौर में प्रदीप उपाध्याय का यह प्रयास यह साबित करता है कि यदि हर व्यक्ति बेजुबान जीवों के लिए थोड़ा-सा समय और संवेदना दे दे, तो समाज में दया, करुणा और मानवता की भावना और भी मजबूत हो सकती है।




