तीन वर्षों में 35 की बढ़ोतरी, गांवों में बढ़ा मानव-वन्यजीव संघर्ष
सड़क और बिजली हादसों में दो भालुओं की मौत
संरक्षण बनाम सुरक्षा की चुनौती

चंदौली। चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में भालुओं का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। वन विभाग की हालिया गणना के अनुसार अभयारण्य में भालुओं की संख्या 200 के पार पहुंच गई है। बीते तीन वर्षों में करीब 35 भालुओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे कुल संख्या लगभग 205 हो गई है।
हालांकि भालुओं की बढ़ती संख्या को जैव विविधता और संरक्षण की दृष्टि से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन इसका दूसरा पहलू आसपास बसे गांवों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। जंगलों में भोजन और पानी के प्राकृतिक स्रोतों की कमी के कारण भालू अब मानव बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।

गांवों में बढ़ी आवाजाही, फसलों को नुकसान
अभयारण्य से सटे गांवों के खेतों, सिवान और बाग-बगीचों में भालुओं की आवाजाही आम हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार शाम ढलते ही भालू खेतों में घुस आते हैं और मक्का, अरहर, सब्जियों व अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। कई स्थानों पर ग्रामीणों ने रात में खेतों की रखवाली शुरू कर दी है, जिससे उनकी दिनचर्या और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण की सफलता की कीमत वे अपनी फसल और जान जोखिम में डालकर चुका रहे हैं। बच्चों और महिलाओं के अकेले बाहर निकलने में भी डर का माहौल है।
आंकड़ों में बढ़ोतरी की तस्वीर
वन विभाग के अनुसार वर्ष 2022 में अभयारण्य क्षेत्र में भालुओं की संख्या 170 थी, जिसमें 80 नर, 60 मादा और 30 शावक शामिल थे। वर्ष 2025 की गणना में यह संख्या बढ़कर 205 हो गई है, जिसमें लगभग 90 नर, 60 मादा और 39 शावक दर्ज किए गए हैं।
इस प्रकार तीन वर्षों में कुल 35 से अधिक भालुओं की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे बेहतर संरक्षण, शिकार पर नियंत्रण और अनुकूल प्रजनन परिस्थितियों का परिणाम मान रहे हैं।
सड़क और बिजली हादसों में दो भालुओं की मौत
भालुओं की बढ़ती गतिविधियों के बीच हादसों का खतरा भी बढ़ा है। बीते सात वर्षों में दो भालुओं की दुर्घटनाओं में मौत हो चुकी है।
13 सितंबर 2019 को चकिया-नौगढ़ मार्ग पर गोड़टुटवा गांव के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से एक मादा भालू की मौत हो गई थी।
28 जनवरी 2021 को नौगढ़ रेंज के पंडी कंपार्टमेंट में टूटे 11 हजार वोल्ट के बिजली तार की चपेट में आने से एक भालू की दर्दनाक मौत हुई थी।
इन घटनाओं ने वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत और यातायात प्रबंधन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है।

वन विभाग की अपील
बी शिवशंकर, प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) चंदौली ने कहा, “चंद्रप्रभा अभयारण्य में भालुओं की संख्या बढ़ना जैव विविधता के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि संरक्षण प्रयास सफल हो रहे हैं। ग्रामीणों से अपील है कि वे सतर्क रहें और वन विभाग को तुरंत सूचना दें, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”
वन विभाग द्वारा संवेदनशील गांवों में जागरूकता अभियान चलाने और त्वरित सूचना तंत्र को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।
संरक्षण बनाम सुरक्षा की चुनौती
चंद्रप्रभा अभयारण्य पूर्वांचल का महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र है। यहां भालुओं के अलावा तेंदुआ, हिरण, नीलगाय और विभिन्न पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं। भालुओं की बढ़ती संख्या जहां प्राकृतिक संतुलन का संकेत है, वहीं मानव बस्तियों के करीब उनकी मौजूदगी नई चुनौतियां भी खड़ी कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में जल स्रोतों का संरक्षण, पर्याप्त भोजन उपलब्धता और वन क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तो भालुओं की बस्तियों की ओर आवाजाही कम की जा सकती है। साथ ही ग्रामीणों को मुआवजा और सुरक्षा उपायों की स्पष्ट व्यवस्था भी जरूरी है।
संरक्षण की उपलब्धि
चंद्रप्रभा अभयारण्य में भालुओं की संख्या का 200 के पार पहुंचना संरक्षण की दृष्टि से उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती भी बढ़ी है। प्रशासन, वन विभाग और ग्रामीणों के समन्वय से ही इस संतुलन को कायम रखा जा सकता है, ताकि जैव विविधता भी सुरक्षित रहे और गांवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

