शास्त्र अध्ययन, पूजा-पाठ और सत्मार्ग पर चलने का किया आह्वान, नशा व मांसाहार से दूर रहने की दी सीख
इलिया, चंदौली। राधा कृष्ण सेवा समिति धन्नीपुर के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस की निशा में वृंदावन से पधारे कथा वाचक व्रजरज दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्ति और धर्म का अमृत रसपान कराया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान की महिमा का श्रवण कर भाव-विभोर हो गए।

कथा की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण और व्यास देव के स्मरण के साथ हुई। कथा वाचक व्रजरज दास जी महाराज ने पुराणों और वेदों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सनातन धर्म में ज्ञान और भक्ति का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने जीवन में धर्म, भक्ति और सदाचार को अपनाता है, तभी उसका जीवन सफल और सार्थक बनता है।
महाराज ने व्यास देव के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि महर्षि व्यास ने ही वेदों और पुराणों के ज्ञान को व्यवस्थित कर मानव समाज को एक दिशा दी। उन्होंने बताया कि महर्षि व्यास के द्वारा रचित ग्रंथों के माध्यम से आज भी समाज को धर्म, नीति और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। श्रीमद्भागवत महापुराण भी महर्षि व्यास की महान देन है, जिसके श्रवण मात्र से मनुष्य के पापों का नाश होता है और उसे भगवान की भक्ति का मार्ग प्राप्त होता है।

कथा के दौरान व्रजरज दास जी महाराज ने “पंडित” शब्द की भी विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि पंडित केवल वह नहीं होता जो पुस्तकों का ज्ञान रखता हो, बल्कि सच्चा पंडित वही होता है जो शास्त्रों के ज्ञान को अपने जीवन में उतारता है और समाज को धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति ज्ञान के साथ-साथ विनम्रता, सेवा भाव और सदाचार को अपनाता है, वही वास्तविक अर्थों में पंडित कहलाने योग्य होता है।
धर्म और सदाचार से ही जीवन होता है सफल
कथा वाचक ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन बहुत मूल्यवान है और इसे अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शास्त्रों का अध्ययन, नियमित पूजा-पाठ और भगवान के नाम का स्मरण करने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। इससे मन शांत और पवित्र होता है तथा व्यक्ति के भीतर अच्छे संस्कार विकसित होते हैं।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में बुरी आदतों से दूर रहें। विशेष रूप से नशा, मदिरा, मुर्गा और मांस के सेवन से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि ये सभी चीजें मनुष्य के जीवन और स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं। इनसे व्यक्ति का मन और विचार भी दूषित हो जाते हैं।
महाराज ने कहा कि यदि मनुष्य भगवान की भक्ति, सत्संग और अच्छे कर्मों को अपनाए तो उसका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए धार्मिक आयोजनों और सत्संग का विशेष महत्व है। इससे नई पीढ़ी को भी धर्म और संस्कृति की सही जानकारी मिलती है।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। पूरा पंडाल “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ कथा का श्रवण किया और भगवान से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने कथा वाचक का स्वागत और सम्मान भी किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बनता है और लोगों को धर्म तथा संस्कृति के प्रति जागरूक होने का अवसर मिलता है।
इस दौरान त्यागी जी महराज, बबलू यादव,राम स्वारथ यादव,राम निहोर यादव, विजय विश्वकर्मा, कमलेश यादव, अशोक विश्वकर्मा, संजू यादव, निर्मला यादव, प्रमिला यादव, बल्लू यादव, सिपाही यादव, हवलदार यादव सहित सैकड़ों लोगों ने कथा का रसपान किया।




