लाखों की लागत से बना लेकिन बेसिन–टोटियां गायब जिम्मेदार मौन

शहाबगंज (चंदौली)।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शहाबगंज के ब्लॉक परिसर में बना इकलौता शौचालय बदहाली का शिकार हो चुका है। स्वास्थ्य और स्वच्छता के नाम पर 2022-23 मे लगभग 7 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह सामुदायिक शौचालय आज उपयोग के लायक नहीं बचा है। हालात इतने खराब हैं कि शौचालय में हाथ धोने के बेसिन और पानी की टोटियां तक गायब हो चुकी हैं।
मरीज, गर्भवती महिलाएं और स्टाफ परेशान
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर शौचालय की इस स्थिति से इलाज के लिए आने वाले मरीज, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे ही नहीं बल्कि स्वास्थ्यकर्मी भी परेशान हैं। मजबूरी में लोगों को खुले में जाने को विवश होना पड़ रहा है, जिससे संक्रमण फैलने और विभिन्न बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

लाखों खर्च का दावा, जवाबदेही शून्य
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शौचालय निर्माण के समय लाखों रुपये खर्च होने का दावा किया गया था। इसके बावजूद आवश्यक सुविधाओं का गायब होना निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बेसिन और टोटियां कब और कैसे गायब हुईं, इसकी जिम्मेदारी किसकी है—यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।
ब्लॉक परिसर में यह हाल, गांवों का क्या होगा
जब ब्लॉक परिसर जैसे निगरानी वाले स्थान पर बने इकलौते शौचालय की यह स्थिति है, तो दूर-दराज गांवों में बने शौचालयों की हालत का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन के जमीनी क्रियान्वयन की पोल खोलती है।
स्वच्छ भारत मिशन पर करारा तमाचा
स्वच्छ भारत मिशन और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के तहत बने शौचालय की बदहाली सरकारी दावों पर करारा तमाचा है। यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ही शौचालय शोपीस बनकर रह जाएं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की वास्तविकता अपने आप सामने आ जाती है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब तक संज्ञान लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
नही होती शौचालय की कभी सफाई
ग्रामीणों का आरोप है की सफाई कर्मी जब ब्लॉक कार्यालय में लेखाकार के रूप में कार्य करेंगे तो सफाई की जिम्मेदारी कौन लेगा।उधर स्वास्थ्य विभाग पर तो इसका कोई असर ही नही सफाई हो या न हो।




