46 दिन बाद भी आईजीआरएस पर कार्रवाई शून्य, व्यवस्था सवालों के घेरे में
इलिया / चन्दौली : जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए बनाई गई आईजीआरएस व्यवस्था चन्दौली जनपद में दम तोड़ती नजर आ रही है। हालात यह हैं कि शहाबगंज विकास खण्ड के एक गांव से संबंधित शिकायत को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज हुए कई सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उसका निस्तारण नहीं हो सका है।
यही नहीं, 25 दिसंबर 2025 को दर्ज की गई दो अन्य
शिकायतें—
शिकायत संख्या 40019625021339 (मुख्य विकास अधिकारी से संबंधित)
शिकायत संख्या 40019625021342 (पंचायती राज अधिकारी से संबंधित)
46 दिन बीत जाने के बाद भी पोर्टल पर “लंबित” ही शो कर रही हैं। नियमों के मुताबिक 30 दिन में निस्तारण अनिवार्य है, लेकिन यहां समय-सीमा सिर्फ़ दिखावे तक सिमट कर रह गई है।

जिला स्तर पर ही अटकी जांच, ब्लॉक–तहसील की क्या बिसात?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब शिकायतें जिला स्तर के अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भी लंबित पड़ी हैं, तो शहाबगंज जैसे विकास खण्डों में ग्रामीणों की शिकायतों का हश्र क्या होता होगा?
क्या वहां शिकायतें सिर्फ़ पोर्टल पर चढ़ाने के लिए दर्ज की जाती हैं और फिर फाइलों में दफन कर दी जाती हैं?

बिना जांच रिपोर्ट, सिर्फ़ ‘वाहवाही मॉडल’
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आईजीआरएस पर कई मामलों में मौके पर जाए बिना ही रिपोर्ट लगा दी जाती है। उद्देश्य न समस्या का समाधान, न जवाबदेही— बस पोर्टल पर निस्तारण दिखाओ और उच्चाधिकारियों से शाबाशी बटोर लो। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।
व्यवस्था खुद बन गई व्यंग्य
आज हालात ऐसे हैं कि गांव से शिकायत जाती है, ब्लॉक से जिला घूमती है और पोर्टल पर “लंबित” बनी रहती है
अगर यही हाल रहा तो जनसुनवाई नहीं, बल्कि “जन-थकान योजना” कहना ज़्यादा सही होगा।
बड़ा सवाल—कब होगा असली निस्तारण?
शहाबगंज विकास खण्ड के गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक लंबित शिकायतें यह साबित कर रही हैं कि जनसुनवाई व्यवस्था कागज़ों में भले मजबूत हो, लेकिन ज़मीन पर उसकी हालत कमजोर है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन मामलों में वास्तविक जांच कर समयबद्ध कार्रवाई करता है या फिर यह शिकायतें भी आईजीआरएस की लंबित फाइलों में गुम होकर रह जाएंगी।

