जन अधिकारों की लड़ाई के लिए दिल्ली कूच का आह्वान, गांव-गांव गूंजा विरोध का स्वर
चंदौली | 24 मार्च को प्रस्तावित दिल्ली रैली को सफल बनाने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)व सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने जन-जागरण अभियान तेज कर दिया है। विभिन्न गांवों और कस्बों में पहुंचकर पार्टी के नेताओं ने आम जनता से संवाद स्थापित किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।
इस अभियान में प्रमुख रूप से सीपीएम नेता लालचंद एडवोकेट, लालमणि विश्वकर्मा, जय प्रकाश विश्वकर्मा, लाल जी मास्टर, नंदलाल, बड़े लाल, छोटेलाल सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे। सभी नेताओं ने मिलकर लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली रैली मजदूर, किसान और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
जन-जागरण के दौरान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां आम लोगों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने मांग की कि मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को तुरंत रद्द किया जाए, क्योंकि इससे देश के छोटे व्यापारियों और किसानों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही, चार नए लेबर कोड को वापस लेने की मांग करते हुए कहा गया कि ये कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं।
नेताओं ने मनरेगा कानून को फिर से बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उनका कहना था कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए जीवन रेखा है, लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते यह योजना कमजोर होती जा रही है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले का भी विरोध किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के जरिए आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
बिजली के मुद्दे पर भी नेताओं ने सरकार को घेरा और कहा कि आम जनता को राहत देने के लिए 200 यूनिट बिजली मुफ्त दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच बिजली, पानी और अन्य बुनियादी जरूरतों पर बढ़ते खर्च से आम आदमी परेशान है, ऐसे में सरकार को राहतकारी कदम उठाने चाहिए।
जन-जागरण अभियान के दौरान नेताओं ने लोगों से बड़ी संख्या में 24 मार्च को दिल्ली पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह रैली सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि आम जनता की आवाज को बुलंद करने का एक बड़ा मंच है। इसमें शामिल होकर लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता का परिचय देंगे।
कार्यक्रम के दौरान गांव-गांव में नारेबाजी भी की गई और लोगों को पर्चे वितरित किए गए। कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे लगातार लोगों से संपर्क कर रहे हैं और रैली को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटे हैं।
अंत में नेताओं ने कहा कि जब तक सरकार जनविरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए आगे आएं और 24 मार्च की रैली में शामिल होकर अपनी आवाज को मजबूत करें।



