धान रोपाई से पहले किसानों ने उठाई सिंचाई और बाढ़ निकासी की मांग, गोष्ठी में गरजे वक्ता
चकिया, चंदौली। किसान विकास मंच के तत्वावधान में रविवार को घोड़सारी गांव स्थित किसान नेता राजकुमार सिंह के आवास पर किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में क्षेत्र के किसानों ने खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं, सिंचाई व्यवस्था, बाढ़ निकासी, बढ़ती कृषि लागत, गेहूं खरीद व्यवस्था और बिजली दरों में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने आगामी धान रोपाई के मद्देनजर किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को प्रमुखता से उठाते हुए इनके समाधान के लिए संगठित प्रयासों पर बल दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान विकास मंच के अध्यक्ष राधेश्याम पांडेय ने कहा कि खेती को कभी देश की सबसे उत्तम आजीविका माना जाता था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में किसान लगातार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक किसी भी सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक खेती की स्थिति में सुधार संभव नहीं है।
संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने कहा कि धान की रोपाई शुरू होने में लगभग एक माह का समय शेष है। ऐसे में सिंचाई और बाढ़ निकासी की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नहरों, राजवाहों और जल निकासी के मार्गों की सफाई तथा मरम्मत नहीं कराई गई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी समस्याओं को लेकर सिंचाई विभाग, बंधी डिवीजन तथा अन्य संबंधित सरकारी संस्थाओं पर दबाव बनाएं और जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेकर समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करें।

गोष्ठी में वक्ताओं ने खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर वैश्विक आर्थिक नीतियों के प्रभाव की भी चर्चा की। कई वक्ताओं ने कृषि लागत में लगातार हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डीजल, खाद, बिजली और कृषि उपकरणों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। किसानों ने गेहूं खरीद व्यवस्था, आपदा राहत मुआवजा और बाढ़ राहत वितरण को लेकर भी असंतोष जताया। वक्ताओं ने कहा कि किसानों को समय पर राहत और उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ रही हैं।
इस दौरान किसानों ने एकजुटता और संघर्ष के समर्थन में नारे भी लगाए। “उठो छात्र मजदूर किसान, जाग रहा है हिंदुस्तान” तथा “निकलो बंद मकानों से, संघर्ष करो बेईमानों से” जैसे नारों से गोष्ठी का माहौल गूंज उठा।
कार्यक्रम में हास्य-व्यंग्य कवि बेचयी सिंह ने अपनी रचनाओं के माध्यम से किसानों का मनोरंजन किया और सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुतियों को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
गोष्ठी में उपेंद्र सिंह, सुरेश मौर्य, भीष्म नारायण यादव, अनिल सिंह, राजकुमार सिंह, राजेश्वर सिंह, ओमप्रकाश सिंह, चंद्र सुधीर सिंह, रामप्रकाश सिंह, रामलाल, कन्हैया सिंह, अमित कुमार सिंह, गोविंद गुप्ता, अभिनव सिंह, वीरेंद्र सिंह, राम औतार सिंह, दिलीप सिंह, राम अनंत पांडेय, अंकित पांडेय, बलवंत सिंह, मनीष सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बेचयी सिंह ने तथा संचालन राम अवध सिंह ने किया। गोष्ठी के अंत में किसानों को जागरूक और संगठित रहने का आह्वान किया गया।



