हादसे के बाद राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल, कार्रवाई के बजाय ‘समझौते’ के आरोप
इलिया (चंदौली):
क्षेत्र में बढ़ते अवैध खनन के बीच बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। गांधीनगर के नसबंदी मौजा के पास मिट्टी लादने जा रहा एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर कर्मनाशा नहर में पलट गया। इस हादसे में चालक अंगद घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने किसी तरह उसे नहर से बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया, जानकारी के अनुसार, लतीफशाह क्षेत्र में इन दिनों अवैध खनन का कार्य जोरों पर है। रात के अंधेरे में खनन माफिया बेखौफ होकर मिट्टी की खुदाई कर ट्रैक्टर-ट्रॉली से ढुलाई कर रहे हैं। बुधवार को भी एक ट्रैक्टर मिट्टी लेने कर्मनाशा नहर के रास्ते लतीफशाह जा रहा था। जैसे ही वह गांधीनगर के नसबंदी मौजा के पास पहुंचा, वाहन अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरा।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायल चालक को बाहर निकाला और इलाज के लिए भेजा। इस घटना ने एक बार फिर अवैध खनन के खतरनाक स्वरूप को उजागर कर दिया है।
राजस्व विभाग की टीम पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में अवैध खनन कोई नई बात नहीं है, बल्कि लंबे समय से यह कारोबार खुलेआम चल रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व विभाग की टीमें अक्सर इलाके में गश्त करती नजर आती हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी मशीनों को रोकती भी हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित रहती है। कुछ ही देर बाद कथित तौर पर ‘सेटिंग’ के जरिए मामलों को रफा-दफा कर दिया जाता है और वाहन फिर से खनन कार्य में लग जाते हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि विभाग सख्ती से कार्रवाई करता, तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं। उनका कहना है कि विभाग की ढिलाई और संभावित मिलीभगत के चलते खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यही वजह है कि वे बिना किसी डर के नहर किनारे और खेतों से मिट्टी निकाल रहे हैं।
पहले भी हो चुके हैं हादसे, फिर भी नहीं जागा प्रशासन
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अवैध खनन के दौरान कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। किसी भी स्तर पर न तो ठोस जांच होती है और न ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई। लोगों का मानना है कि प्रशासन की यह लापरवाही भविष्य में और बड़े हादसों को न्योता दे सकती है। नहर किनारे भारी मशीनों और ओवरलोड ट्रैक्टरों की आवाजाही से न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है, बल्कि आसपास की जमीन और संरचनाओं को भी नुकसान पहुंच रहा है।
ग्रामीणों की मांग—सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय हो
हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने राजस्व और खनन विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन हादसे के बाद क्षेत्र में अवैध खनन और राजस्व विभाग की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।




