बज्मे इरफान अदब के मंच से गूंजा भाईचारे और मोहब्बत का संदेश
शहाबगंज (चंदौली)। क्षेत्र के बड़गावां गांव में रविवार की देर शाम बज्मे इरफान अदब के तत्वावधान में कौमी यकजहती (राष्ट्रीय एकता) के नाम पर भव्य मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे शायरों और शायराओं ने अपनी बेहतरीन रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। देश की गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के संदेश से सराबोर कलामों को श्रोताओं ने खूब सराहा।

कार्यक्रम के कन्वीनर कलाम बनारसी ने सभी अतिथियों, शायरों और शायराओं का अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने साहित्य और कलम की ताकत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने अपना कलाम पढ़ते हुए कहा, “पिसर ने की बाबा ये काम मत करना, अमीरे शहर को झुककर सलाम मत करना। कलम वकार है, रोटी के वास्ते हरगिज़, कलम को अपने किसी का गुलाम मत करना।” उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।

महताब आलम खान ने अपनी कविता में समकालीन परिस्थितियों पर व्यंग्य करते हुए कहा, “प्यादे ने शहसवार के तोते उड़ा दिए।” वहीं इलाहाबाद से आए शायर अनवार गौहर ने अपने अंदाज में मौजूदा हालात पर कटाक्ष करते हुए पढ़ा, “न रंगी सुबह बाकी है, न दिलकश शाम बाकी है, लगे रहिए दलाली में, यही एक काम बाकी है।” उनकी प्रस्तुति को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।

मुशायरे में सिम्मी गाजीपुरी, शहजादी नूरी जौनपुरी, जकिया बाराबंकवी, अबु शहमा, रोशन मुगलसराई, अनवार गौहर, उबैद अख्तर, डॉ. इरफान इकबाल, शकीर साहब और अफजल इलाहाबादी सहित अन्य शायरों ने अपने कलाम पेश किए। शायरों ने प्रेम, इंसानियत, सामाजिक सरोकार, राष्ट्रीय एकता और समकालीन विषयों पर आधारित रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चले इस मुशायरे में साहित्य प्रेमियों की भारी भीड़ जुटी रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अशफाक आबिद ने की तथा संचालन इसराईल इशरत ने किया। आयोजन को सफल बनाने में जमील अहमद, अलाउद्दीन, सलाहुद्दीन , अलाउद्दीन कादरी, आफताब आलम, मिनहाज अहमद, अफसर अली, रईसुल, हाफिज तौफीक,इबरार ,इमरान खान,आरिफ, हसनैन,साजिद सहित अन्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, शायरों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।



