शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ चकरोड का सीमांकन, अतिक्रमण से विकास कार्य प्रभावित
शहाबगंज (चंदौली)। विकास खंड शहाबगंज के ग्राम पंचायत भुड़कुड़ा अंतर्गत मझुई गांव में स्थित राजस्व अभिलेखों में दर्ज चकरोड की भूमि का सीमांकन और पैमाइश न होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने और एक माह पूर्व उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार मझुई गांव की आराजी संख्या 24 एवं 29 राजस्व अभिलेखों में चकरोड के रूप में दर्ज है। यह चकरोड ग्रामीणों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। पिछले वित्तीय वर्ष में क्षेत्र पंचायत की ओर से इस मार्ग पर विकास कार्य भी कराया गया था, लेकिन आज तक इसका विधिवत सीमांकन नहीं कराया जा सका। सीमांकन न होने के कारण कुछ लोगों द्वारा चकरोड की भूमि पर अतिक्रमण कर उसे अपने खेतों में मिलाने की शिकायत सामने आई है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य पवन कुमार का कहना है कि चकरोड की पैमाइश और सीमांकन कराने के लिए कई बार तहसील दिवस में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके अलावा लगभग एक माह पूर्व उपजिलाधिकारी पवन कुमार यादव को भी लिखित प्रार्थना पत्र देकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई थी। बावजूद इसके अब तक राजस्व विभाग की ओर से कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। उनका आरोप है कि मामला लगातार अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा रहा है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते चकरोड का सीमांकन करा दिया जाए तो अतिक्रमण की समस्या समाप्त हो सकती है। साथ ही गांव के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और क्षेत्र पंचायत द्वारा प्रस्तावित विकास कार्यों को भी गति मिल सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र पैमाइश कराकर चकरोड को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
इस संबंध में प्रशासन का पक्ष जानने के लिए उपजिलाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके मोबाइल फोन पर अर्दली ने कॉल रिसीव करते हुए बताया कि “साहब अभी आए हैं और आराम कर रहे हैं।” इसके चलते समाचार लिखे जाने तक उपजिलाधिकारी का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।



