राज्य कर्मचारी का दर्जा, 24 हजार रुपये मानदेय और लंबित भुगतान की मांग
चेतावनी- मांगें पूरी न हुईं तो 1 जुलाई से होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन
चंदौली। मनरेगा सहित विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं के संचालन में अहम भूमिका निभाने वाले ग्राम रोजगार सेवकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। वर्षों से नियमितीकरण, सम्मानजनक मानदेय और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे ग्राम रोजगार सेवकों ने मंगलवार को अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी चंदौली को सौंपा। ग्राम रोजगार सेवक (पंचायत मित्र) वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश, जनपद चंदौली के बैनर तले सौंपे गए ज्ञापन में शासन से जल्द निर्णय लेने की मांग की गई है।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में लगभग 36 हजार ग्राम रोजगार सेवक वर्ष 2006 से मनरेगा योजना के अंतर्गत संविदा पर कार्य कर रहे हैं। बीते 17 वर्षों से अधिक समय से ग्राम पंचायतों में कार्यरत रहने के बावजूद आज तक उनकी सेवा शर्तों, मानदेय और भविष्य को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। इससे रोजगार सेवकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
सिर्फ मनरेगा नहीं, सभी योजनाओं में निभा रहे अहम भूमिका

ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम रोजगार सेवक केवल मनरेगा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण विकास, पंचायत प्रशासन और सरकारी योजनाओं के संचालन में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ती गई है, लेकिन उनके कार्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है।
संगठन का कहना है कि प्रदेश में लगभग 58 हजार ग्राम पंचायतें हैं, जबकि पंचायत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों की संख्या करीब 15 हजार है। ऐसे में एक सचिव के पास औसतन चार ग्राम पंचायतों का कार्यभार है। इस स्थिति में ग्राम रोजगार सेवक ही पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के संचालन और ग्रामीण समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री की घोषणा लागू करने की उठी मांग
ग्राम रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ के डिफेंस एक्सपो मैदान में की गई घोषणा का हवाला देते हुए कहा कि उस समय रोजगार सेवकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मानव संसाधन नीति (एचआर पॉलिसी) बनाए जाने की घोषणा की गई थी। संगठन का आरोप है कि घोषणा के वर्षों बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप एचआर पॉलिसी लागू करते हुए ग्राम रोजगार सेवकों को न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाए और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाया जाए।
12 से 14 माह का मानदेय बकाया, आर्थिक संकट गहराया
ज्ञापन में सबसे गंभीर मुद्दा लंबित मानदेय का उठाया गया है। संगठन का कहना है कि प्रदेश के अनेक ग्राम रोजगार सेवकों का 12 से 14 माह का मानदेय अब भी बकाया है। समय पर भुगतान न होने से उनके सामने परिवार चलाने, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और दैनिक जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।
रोजगार सेवकों ने कहा कि कई कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और उनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इसलिए लंबित मानदेय का भुगतान तत्काल कराया जाना चाहिए।
मोबाइल और डेटा सुविधा की भी मांग
मनरेगा कार्यों की निगरानी और एनएमएमएस आधारित उपस्थिति प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए संगठन ने उच्च गुणवत्ता वाले एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा नियमित डेटा रिचार्ज की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यम से काम कराने के बावजूद आवश्यक संसाधन कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
इन 10 मांगों पर जोर
संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में प्रमुख रूप से राज्य कर्मचारी का दर्जा, नियमितीकरण, न्यूनतम 24 हजार रुपये मानदेय, लंबित भुगतान, सेवा सुरक्षा, अवकाश सुविधा, स्थानांतरण नीति, मृतक आश्रित को सेवा लाभ, विभागीय कर्मचारी घोषित करने तथा पंचायत स्तर पर समायोजन जैसी मांगें शामिल हैं।
1 जुलाई से आंदोलन की चेतावनी
ग्राम रोजगार सेवक (पंचायत मित्र) वेलफेयर एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों और समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो आगामी 1 जुलाई 2026 से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने बताया कि इस दौरान विधानसभा घेराव के साथ-साथ लखनऊ के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में जिला अध्यक्ष कन्हैया लाल, उपाध्यक्ष मनोज गुप्ता, महासचिव रविप्रकाश पाण्डेय, महामंत्री संतोष कुमार पाण्डेय सहित संगठन के कई पदाधिकारी एवं ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहे।




