क्या एक ही स्थल पर तीसरी बार भी होगा भुगतान? क्षेत्र पंचायत के कार्य की एमबी और भुगतान फाइल बढ़ने से उठे सवाल
चंदौली एक्सप्रेस | शहाबगंज ! शहाबगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत घोड़सारी में मनरेगा कार्यों में कथित डबलिंग और ट्रिपलिंग के आरोपों के बीच एक नया मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस कार्यस्थल को लेकर पहले से ही एक ही स्थान पर अलग-अलग नामों से बार-बार कार्य स्वीकृत कराने और लाखों रुपये के प्राकलन तैयार करने के आरोप लग रहे हैं, उसी क्षेत्र में क्षेत्र पंचायत द्वारा कराए जा रहे कार्य पर अब 14 दिन का एनएमएस (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा दी गई है।
जानकारी के अनुसार राज बहादुर के खेत से अवधेश राम के खेत तक चकरोड पर मिट्टी कार्य के नाम से क्षेत्र पंचायत द्वारा कराए जा रहे कार्य पर 14 दिनों तक ऑनलाइन मस्टररोल संचालित किया गया। अब संबंधित कार्य की माप पुस्तिका (एमबी) तैयार कर भुगतान के लिए फाइल आगे बढ़ा दी गई है। इससे ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल और गहरा गया है कि जब कार्यस्थल की समानता और पूर्व में हुए कार्यों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तब भी भुगतान प्रक्रिया को बिना किसी जांच के आगे क्यों बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक ही स्थल पर पूर्व वर्षों में मनरेगा, ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत के माध्यम से कार्य कराए जा चुके हैं और अब उसी क्षेत्र को नए नाम से दर्शाकर फिर से कार्य स्वीकृत किया गया है, तो भुगतान से पहले कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि डबलिंग और ट्रिपलिंग की शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस जांच नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारियों को पूर्व में हुए कार्यों की जानकारी नहीं है, या फिर शिकायतों के बावजूद विभाग अनजान बनने का प्रयास कर रहा है? यदि आरोपों में सत्यता है और एक ही स्थल पर दोबारा या तिबारा कार्य दर्शाकर भुगतान किया जाता है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भुगतान जारी करने से पहले संबंधित कार्य की एनओसी, तकनीकी स्वीकृति, प्राकलन, एमबी और पुराने कार्यों के अभिलेखों का मिलान कराया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच के बिना भुगतान कर दिया गया तो बाद में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाएगा।
अब निगाहें विभागीय अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना यह है कि डबलिंग-ट्रिपलिंग के आरोपों के बीच क्षेत्र पंचायत द्वारा कराए जा रहे इस कार्य की भुगतान फाइल पर रोक लगाकर निष्पक्ष जांच कराई जाती है या फिर विभाग अनजान बनकर कथित रूप से एक ही कार्यस्थल पर दोबारा और तिबारा भुगतान की अनुमति दे देता है। यदि भुगतान हो जाता है तो यह मामला मनरेगा और क्षेत्र पंचायत कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है।



