चंदौली

उच्चाधिकारियों के निर्देश को दरकिनार कर बीएमएम की संबद्धता?

पुराने आदेश में साफ निर्देश—कर्मियों का स्थानांतरण न करने और संबद्धीकरण समाप्त करने की बात, फिर पूर्णेंदु शंकर मिश्रा को शहाबगंज से जिला मुख्यालय किया गया संबद्ध

16 सितंबर के आदेश में संबद्धता का कारण नहीं, अब उठ रहे सवाल—निर्देशों की अनदेखी हुई तो जिम्मेदार कौन?

शहाबगंज।

विकासखंड शहाबगंज के ब्लॉक मिशन प्रबंधक (बीएमएम) पूर्णेंदु शंकर मिश्रा को जिला मुख्यालय स्थित डीएमएमयू से संबद्ध किए जाने के मामले में अब एक नया प्रशासनिक सवाल सामने आया है। वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक कार्यालय से जारी आदेशों में मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मियों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उपलब्ध आदेशों में कहा गया है कि मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मी आउटसोर्सिंग पर हैं और उनका स्थानांतरण मिशन हित में नहीं है। साथ ही किसी प्रकार का विचलन न करने तथा अनावश्यक स्थानांतरण से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

16 सितंबर के आदेश में कारण का उल्लेख नहीं

कार्यालय उपायुक्त स्वत: रोजगार, चंदौली की ओर से 16 सितंबर 2026 को जारी आदेश संख्या 281/स्था0/एनआरएलएम/2026-27 में पूर्णेंदु शंकर मिश्रा, ब्लॉक मिशन प्रबंधक, विकासखंड शहाबगंज को जिला मुख्यालय स्थित डीएमएमयू में अग्रिम आदेश तक संबद्ध किए जाने का उल्लेख है।

आदेश में संबद्धता तत्काल प्रभाव से लागू होने और अतिरिक्त भत्ता देय नहीं होने की बात कही गई है। लेकिन संबद्ध किए जाने का कारण आदेश में स्पष्ट नहीं किया गया है।

यहीं से मामला गंभीर हो जाता है। यदि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी तो उसका आधार क्या था? और यदि किसी शिकायत, भुगतान अथवा कार्य संबंधी मामले के कारण कार्रवाई की गई तो क्या उसका उल्लेख आदेश में किया गया या संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण लिया गया?

2022 के निर्देश में क्या कहा गया था?

क्या भुगतान विवाद कार्रवाई का आधार बना?

इसके बाद उसी दिन उनका संबद्धता आदेश जारी हुआ।

एक आदेश बनाम दूसरा आदेश—किसके निर्देश प्रभावी?

पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि एक तरफ मिशन मुख्यालय के पुराने निर्देशों में स्थानांतरण और संबद्धीकरण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था दिखाई देती है, वहीं दूसरी तरफ 16 सितंबर को स्थानीय स्तर से तत्काल संबद्धता का आदेश जारी किया गया।

इससे प्रशासनिक स्तर पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वर्तमान कार्रवाई उच्चाधिकारियों के पूर्व निर्देशों के अनुरूप है?

यदि हां, तो उसका सक्षम आदेश या नियम क्या है?

यदि नहीं, तो निर्देशों से अलग निर्णय लेने की अनुमति किस स्तर से मिली?

अब कार्रवाई और जवाबदेही का सवाल

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