शहाबगंज के बीएमएम पूर्णेंदु शंकर मिश्रा की संबद्धता के बाद सामने आई कर्मचारियों की लंबी सूची, कई के नौकरी छोड़ने का दावा
बरहनी से शहाबगंज पहुंचे पंकज जायसवाल समेत तीन बीएमएम के स्थानांतरण की चर्चा, पुराने आदेशों में स्थानांतरण को लेकर भी उठ चुके हैं सवाल
चंदौली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में जिला डीसी श्वेता सिंह और कर्मचारियों के बीच कार्यप्रणाली को लेकर विवाद लगातार चर्चा में है। शहाबगंज के बीएमएम पूर्णेंदु शंकर मिश्रा की तत्काल संबद्धता के मामले के बाद अब कई पूर्व कर्मचारियों और बीएमएम के नौकरी छोड़ने तथा कई कर्मचारियों के स्थानांतरण से जुड़े दावे सामने आए हैं। इससे जिला मिशन प्रबंधन इकाई (श्वेता सिंह) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले में सबसे गंभीर दावा यह है कि कुछ कर्मचारियों ने कथित मानसिक दबाव अथवा उत्पीड़न के कारण नौकरी छोड़ दी। हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित कर्मचारियों के लिखित बयान अथवा इस्तीफे के कारण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इसलिए पूरे मामले की विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
कंप्यूटर ऑपरेटरों में भी नौकरी छोड़ने का दावा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार कथित मानसिक उत्पीड़न के चलते नौकरी छोड़ने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों में तीन नाम बताए जा रहे हैं—
सचिन कुमार — चहनियां
पुनीत कुमार श्रीवास्तव — डीएमएमयू
नेहा मिश्रा — डीएमएमयू
यदि इन कर्मचारियों ने वास्तव में कार्यस्थल के दबाव अथवा किसी अधिकारी के व्यवहार को कारण बताते हुए नौकरी छोड़ी है तो उनके इस्तीफे और शिकायतों की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
कई बीएमएम के नौकरी छोड़ने का भी दावा
इसी तरह कुछ पूर्व बीएमएम के बारे में भी दावा किया गया है कि उन्होंने कथित मानसिक दबाव के चलते नौकरी छोड़ी। इनमें
अग्निवेश यादव — शहाबगंज
राजीव यादव — चकिया
विरल कुमार — चकिया
विवेक सिन्हा — नौगढ़ , का नाम सामने आया है।
विशेष रूप से नौगढ़ के विवेक सिन्हा के संबंध में हाल में मामला न्यायालय तक पहुंचने का दावा किया गया है। इस दावे की पुष्टि संबंधित मुकदमे के दस्तावेज से किए जाने की आवश्यकता है।
डीएमएमयू के पूर्व कर्मचारी का भी नाम
जिला मिशन प्रबंधन इकाई (DMMU) के पूर्व कर्मचारी अभिषेक कुमार के नौकरी छोड़ने की बात भी सामने आई है। यदि इन सभी मामलों में इस्तीफे के पीछे समान प्रकार की शिकायतें रही हैं तो यह केवल व्यक्तिगत मामला न रहकर विभागीय कार्यसंस्कृति की जांच का विषय बन सकता है।
स्थानांतरण की सूची भी चर्चा में
वहीं, वर्तमान में बीएमएम स्तर पर स्थानांतरण से जुड़े तीन नाम भी सामने आए हैं—
पंकज कुमार जायसवाल — बरहनी से शहाबगंज
हिरेंद्र नाथ — चहनियां से सकलडीहा
महेंद्र मौर्या — सकलडीहा से नियामताबाद
इनमें पंकज कुमार जायसवाल का बरहनी से शहाबगंज स्थानांतरण खास तौर पर चर्चा में है, क्योंकि इसी बीच शहाबगंज के बीएमएम पूर्णेंदु शंकर मिश्रा को जिला मुख्यालय से संबद्ध करने का आदेश जारी हुआ है।
एक ही ब्लॉक में पति-पत्नी की तैनाती पर भी सवाल
महेंद्र मौर्या के साथ उनकी पत्नी अल्का मौर्या के एक ही ब्लॉक में होने की बात भी सामने आई है। यदि दोनों की तैनाती वास्तव में एक ही विकासखंड में है तो प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह सामान्य स्थानांतरण/तैनाती प्रक्रिया का हिस्सा है या किसी विशेष प्रशासनिक आधार पर किया गया निर्णय।
पुराने शासनादेश से भी बढ़ा विवाद
मामले को और महत्वपूर्ण बनाता है उपलब्ध वर्ष 2022 का मिशन निदेशक स्तर का आदेश। उसमें मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। दूसरे आदेश में संबद्धीकरण समाप्त करने और इस संबंध में प्रस्ताव नहीं भेजने की बात भी दर्ज है।
ऐसे में वर्तमान समय में किए जा रहे स्थानांतरण और संबद्धीकरण के संबंध में विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि किन नियमों और सक्षम अनुमति के तहत ये निर्णय लिए जा रहे हैं।
क्या सभी मामलों को जोड़कर डीसी पर कार्रवाई की जरूरत?
एक ओर कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने के दावे हैं, दूसरी ओर बीएमएम के स्थानांतरण और संबद्धता के मामले हैं। इसके बीच शहाबगंज बीएमएम पूर्णेंदु शंकर मिश्रा द्वारा कथित अभद्रता और दबाव के आरोप लगाए गए हैं।
सार्वजनिक रिकॉर्ड में श्वेता सिंह को चंदौली में डीसी एनआरएलएम के रूप में बैठकों में शामिल बताया गया है और अगस्त 2026 की रिपोर्ट में उन्हें जिला विकास अधिकारी के रूप में भी उल्लेखित किया गया है।
इसलिए अब सवाल यह है कि क्या अलग-अलग घटनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय पिछले कुछ वर्षों में एनआरएलएम में हुए स्थानांतरण, संबद्धीकरण और कर्मचारियों के इस्तीफों का एक साथ प्रशासनिक ऑडिट कराया जाना चाहिए?
जांच में सामने आने चाहिए ये सवाल
किन कर्मचारियों ने कब और किस कारण से इस्तीफा दिया?
क्या किसी कर्मचारी ने मानसिक उत्पीड़न की लिखित शिकायत की थी?
यदि शिकायत हुई तो उसका निस्तारण किस स्तर पर हुआ?
बीएमएम के स्थानांतरण का आधार क्या था?
क्या स्थानांतरण के लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई?
2022 के मिशन निदेशक के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं?
पूर्णेंदु शंकर मिश्रा की संबद्धता का कारण आदेश में क्यों नहीं है?
क्या स्थानांतरण और संबद्धीकरण की पूरी प्रक्रिया का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है?
जिन कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ी, उनके इस्तीफे में कारण क्या दर्ज है?
मामला अब सिर्फ एक बीएमएम की संबद्धता तक सीमित नहीं रह गया है। यदि सामने आए दावों में तथ्य हैं तो कई वर्षों की प्रशासनिक कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच से ही यह पता चल सकेगा कि कर्मचारियों के स्थानांतरण और इस्तीफे सामान्य प्रशासनिक निर्णय थे या उनके पीछे कोई लगातार चली आ रही कार्यस्थल संबंधी समस्या थी।




