धरना-प्रदर्शन के बाद सीएमओ ने दिया था नियमित उपस्थिति का भरोसा, फिर डॉक्टर व फार्मासिस्ट की गैरहाजिरी पर कार्रवाई के निर्देश
चकिया। कटवा माफी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित गैरहाजिरी को लेकर ग्रामीणों में बढ़ती नाराजगी के बीच अब विधायक कैलाश आचार्य ने सख्त रुख अपनाया है। कुछ दिन पूर्व चिकित्सकों की गैरहाजिरी और स्वास्थ्य सेवाओं में अव्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने पीएचसी परिसर में धरना-प्रदर्शन किया था। मामले की जानकारी मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) परितोष मिश्रा मौके पर पहुंचे थे और ग्रामीणों को समझाकर धरना समाप्त कराया था। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया था।
सीएमओ के आश्वासन के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पीएचसी की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार होगा और चिकित्सक निर्धारित समय पर अस्पताल में मौजूद रहेंगे। हालांकि, कुछ ही दिनों बाद दोबारा चिकित्सकों और फार्मासिस्ट की गैरहाजिरी का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।
कई दिनों तक डॉक्टर और फार्मासिस्ट की गैरहाजिरी
पीएचसी पर डॉक्टर चंद्रगुप्त सिंह और फार्मासिस्ट अखिलेश पांडेय के कई दिनों तक अनुपस्थित रहने की जानकारी सामने आने के बाद मामला विधायक कैलाश आचार्य तक पहुंचा। विधायक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी सूचना सीएमओ और जिलाधिकारी को दी। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
विधायक के निर्देश के बाद डॉक्टर चंद्रगुप्त सिंह की लगातार तीन दिनों की अनुपस्थिति को हाजिरी रजिस्टर में दर्ज करने तथा तीन दिनों का वेतन काटने की कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया। साथ ही स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सकों की ड्यूटी के दौरान नियमित मौजूदगी सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए।
धरने के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर मरीजों पर पड़ता है। दूर-दराज के गांवों से इलाज की उम्मीद में पीएचसी पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सक नहीं मिलने पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार मरीजों को मजबूर होकर निजी अस्पतालों या दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों की नियमित मौजूदगी, मरीजों को समय से उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित कराने की मांग उठाई थी। मौके पर पहुंचे सीएमओ ने समस्या के समाधान और चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति का भरोसा दिया था। इसके बावजूद दोबारा गैरहाजिरी का मामला सामने आने से ग्रामीणों के उस भरोसे पर सवाल उठने लगे हैं।
अस्पतालों में मनमानी बर्दाश्त नहीं: विधायक
विधायक कैलाश आचार्य ने कहा कि सरकारी अस्पताल आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हैं। ड्यूटी के दौरान चिकित्सक अथवा कोई अन्य स्वास्थ्यकर्मी बिना उचित कारण के अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए। मरीजों के इलाज में लापरवाही और ड्यूटी से गैरहाजिरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों पर बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए निर्भर रहते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की अनुपस्थिति से मरीजों को होने वाली परेशानी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारियों को अस्पतालों की व्यवस्था की नियमित निगरानी कर चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।
अब कार्रवाई और नियमित उपस्थिति पर नजर
सीएमओ के आश्वासन के बाद दोबारा गैरहाजिरी का मामला सामने आने से कटवा माफी पीएचसी की व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। विधायक की सख्ती के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाने वाली कार्रवाई और अस्पताल में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति पर ग्रामीणों की नजर है। सवाल यह भी है कि कार्रवाई के बाद क्या पीएचसी में चिकित्सकों की मौजूदगी नियमित हो पाएगी और मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समय से मिल सकेगा।




