किताबी ज्ञान के साथ प्रयोगात्मक शिक्षा पर जोर, मॉडल बनाकर विज्ञान के सिद्धांतों को समझ रहे बच्चे
चंदौली एक्सप्रेस। संवाददाता – इबरार अली
शहाबगंज (चंदौली)। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों में लिखे पाठ को याद करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता और नई चीजों को खोजने की जिज्ञासा विकसित करना भी है। इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में पूर्व माध्यमिक विद्यालय शहाबगंज के विद्यार्थी विज्ञान प्रोजेक्ट निर्माण के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा को निखार रहे हैं। विद्यालय में विद्यार्थी विभिन्न शैक्षणिक सामग्रियों की मदद से विज्ञान से संबंधित मॉडल और प्रोजेक्ट तैयार करने में जुटे नजर आए। इस दौरान बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता, मेहनत और आपसी सहयोग का परिचय दिया।
विद्यालय में विज्ञान प्रोजेक्ट निर्माण की गतिविधि के दौरान शिक्षक रामपति सिंह, केशरी नंदन जायसवाल, विजयी सोनकर और फिरोज अहमद, विकास यादव की मौजूदगी में विद्यार्थियों ने विभिन्न सामग्रियों का उपयोग कर मॉडल तैयार किए। शिक्षक बच्चों को प्रोजेक्ट बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही आवश्यक मार्गदर्शन देते नजर आए। विद्यार्थियों ने उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए अपने विचारों को मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को विज्ञान के विषयों को नजदीक से समझने और उन्हें व्यावहारिक जीवन से जोड़ने का अवसर मिला।
प्रयोग से आसान होती है विज्ञान की पढ़ाई
विज्ञान विषय में प्रयोग और प्रोजेक्ट का विशेष महत्व है। किसी वैज्ञानिक सिद्धांत को केवल पढ़ने या सुनने के बजाय जब विद्यार्थी स्वयं उसका मॉडल तैयार करते हैं, तो विषय को समझना उनके लिए अधिक आसान और रुचिकर हो जाता है। प्रोजेक्ट निर्माण से बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला या किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में सवाल पूछने, कारण तलाशने और समस्याओं का समाधान खोजने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती हैं।
रचनात्मकता के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास
विज्ञान प्रोजेक्ट तैयार करने के दौरान विद्यार्थियों को योजना बनाने, सामग्री का चयन करने, उसे व्यवस्थित करने और अपने विचारों को प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। इससे उनकी रचनात्मकता के साथ ही एकाग्रता, तार्किक सोच और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। समूह में प्रोजेक्ट बनाने से बच्चों में आपसी सहयोग, जिम्मेदारी और टीम भावना का विकास होता है। साथ ही, वे अपने सहपाठियों के विचारों को समझने और उनसे सीखने का अवसर भी प्राप्त करते हैं।
शिक्षकों के मार्गदर्शन में आयोजित ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभा को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे पढ़ाई बोझिल होने के बजाय रुचिकर बनती है और बच्चे स्वयं सीखने के लिए प्रेरित होते हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय शहाबगंज में विज्ञान प्रोजेक्ट निर्माण की यह पहल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में उपयोगी साबित हो रही है।




