विधायक कैलाश आचार्य की पहल पर हुई कार्रवाई, छत से गिर रहे ईंटों के स्लैब से जान-माल का खतरा; मरम्मत कराने की उठी मांग
शहाबगंज । शहाबगंज विकास खंड के जर्जर आवासीय एवं कार्यालय भवनों की समस्या अब शासन तक पहुंच गई है। भवनों की बदहाल स्थिति और संभावित दुर्घटना के खतरे को देखते हुए चकिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक कैलाश आचार्य ने मरम्मत कराने की मांग उठाई। इस संबंध में भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विशेष कार्याधिकारी ओएसडी केपी सिंह ने 16 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
जारी पत्र के मुताबिक, चंदौली जनपद के शाहाबगंज विकास खंड स्थित आवासीय एवं कार्यालय भवन काफी जर्जर अवस्था में हैं। भवनों की छत पर पड़ा ईंटों का स्लैब जगह-जगह से गिर रहा है, जिससे जान-माल के नुकसान की आशंका बनी हुई है। ऐसे में इन भवनों की मरम्मत कराना आवश्यक बताया गया है।
विधायक कैलाश आचार्य ने उठाया मामला
पत्र में उल्लेख है कि चकिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक कैलाश आचार्य ने शाहाबगंज ब्लॉक के आवासीय एवं कार्यालय भवनों की जर्जर स्थिति से संबंधित प्रार्थना पत्र दिया था। विधायक की ओर से उठाए गए इस मामले को रक्षा मंत्री के विशेष कार्याधिकारी केपी सिंह ने संबंधित विभाग तक पहुंचाया है।
केपी सिंह ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, ग्राम्य विकास एवं समग्र ग्राम विकास तथा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को संबोधित पत्र में मामले का उल्लेख करते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित किया है।
कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
शाहाबगंज विकास खंड के कार्यालय भवनों में प्रतिदिन प्रशासनिक कार्यों के सिलसिले में कर्मचारियों और आम लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में यदि छत से ईंटों के स्लैब गिरने की स्थिति बनी हुई है, तो यह सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। जर्जर भवनों की समय रहते मरम्मत नहीं होने पर किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब शासन के फैसले पर टिकी निगाहें
रक्षा मंत्री के विशेष कार्याधिकारी की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद अब संबंधित विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। क्षेत्रीय लोगों को उम्मीद है कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भवनों की स्थिति का आकलन कराएगा और आवश्यक मरम्मत की दिशा में कदम उठाएगा।
हालांकि, पत्र में मरम्मत कार्य शुरू होने की कोई तारीख या बजट स्वीकृति का उल्लेख नहीं है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग की ओर से जांच, बजट आवंटन और मरम्मत को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।




