जिला मुख्यालय से विकास भवन तक सफाईकर्मियों की मठाधीशी, कहीं फाइल तो कहीं सरकारी वाहन संभाल रहे—गांवों में सफाई की बागडोर आखिर किसके हाथ?
चन्दौली एक्सप्रेस चंदौली। गांवों को स्वच्छ रखने के लिए नियुक्त सफाईकर्मियों की तैनाती ग्राम पंचायतों में की गई है, लेकिन जिले में इन कर्मचारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गांवों की गलियों, नालियों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी ब्लॉक कार्यालयों से लेकर जिला मुख्यालय और विकास भवन तक कार्यालयी कामों में लगाए गए हैं। कहीं डाक रिसीव कराने का काम लिया जा रहा है तो कहीं फाइल और रजिस्टर संभालने, कंप्यूटर चलाने तथा बाबुओं की जिम्मेदारियां निभाने में लगाया गया है।
वेतन सफाईकर्मी का है, लेकिन काम बाबू और साहब का—ऐसे में गांवों की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसके भरोसे है?
डाक रिसीव करने से फाइल मेंटेन करने तक
कार्यालयों में तैनात सफाईकर्मियों से डाक रिसीव कराने, पत्रावलियां और फाइलें संभालने, रजिस्टर मेंटेन करने, कंप्यूटर संबंधी कार्य कराने और पत्राचार तक का काम लिया जा रहा है। कई जगह कर्मचारी नियमित कार्यालय कर्मियों की तरह पूरे दिन कार्यालय में बैठकर लिपिकीय जिम्मेदारियां निभाते हैं।
सवाल यह है कि जिस कर्मचारी की नियुक्ति ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था के लिए हुई, वह कार्यालय में बाबू का काम कर रहा है तो गांव की नालियों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई कौन करेगा?
सरकारी वाहन से लेकर साहब के आवास तक जिम्मेदारी
मामला सिर्फ कार्यालयी कार्यों तक सीमित नहीं है। सफाईकर्मियों से अधिकारियों के सरकारी वाहन चलाने, कार्यालय से जुड़े आवागमन और अधिकारी के आवास पर घरेलू जरूरत का सामान बाजार से लाने जैसे काम भी कराए जा रहे हैं।
कुछ स्थानों पर अधिकारी के लिए भोजन तैयार कराने तक की जिम्मेदारी सफाईकर्मियों पर होने की बात सामने आई है। यानी गांव की सफाई के लिए नियुक्त कर्मचारी कहीं चालक है तो कहीं साहब के निजी कामों में लगा है।
जिला मुख्यालय और विकास भवन में ‘मठाधीशी’
सबसे गंभीर सवाल जिला मुख्यालय और विकास भवन में सक्रिय कुछ सफाईकर्मियों की भूमिका को लेकर है। आरोप है कि कुछ कर्मचारी लंबे समय से विभागीय कामकाज में ऐसा प्रभाव रखते हैं कि फरियादी भी अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचते हैं और वे अधिकारी की तरह बैठकर मामलों को देखते हैं।
आरोप यह भी है कि कुछ प्रभावशाली सफाईकर्मी कर्मचारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, वेतन रुकवाने और वेतन लगवाने जैसे मामलों में भी हस्तक्षेप करते हैं और इसके एवज में आर्थिक लाभ लेने का खेल चलता है।
यदि किसी सफाईकर्मी के पास इन मामलों में कोई आधिकारिक अधिकार नहीं है तो फिर यह प्रभाव किसके संरक्षण अथवा निर्देश पर चल रहा है, यह जांच का विषय है।
विधिक सवाल: किस आदेश पर बदली गई ड्यूटी?
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि ग्राम पंचायतों में सफाई के लिए नियुक्त कर्मचारियों को कार्यालयों में लगाने के लिए क्या सक्षम प्राधिकारी का विधिवत लिखित आदेश जारी किया गया है?
यदि आदेश जारी हुआ है तो उसमें कर्मचारी की संबद्धता की अवधि, कार्य और वर्तमान जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जिस ग्राम पंचायत से कर्मचारी को हटाकर कार्यालय में लगाया गया है, वहां सफाई व्यवस्था कौन संभाल रहा है।
यदि कोई सक्षम आदेश नहीं है और कर्मचारी लंबे समय से कार्यालय में लिपिकीय, कंप्यूटर, चालक अथवा अन्य कार्य कर रहे हैं तो ऐसी व्यवस्था की प्रशासनिक जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
उपस्थिति और वेतन रिकॉर्ड की हो जांच
सफाईकर्मी की मूल तैनाती गांव में है और ड्यूटी कार्यालय में, तो उसकी उपस्थिति कहां दर्ज होती है? किस अधिकारी द्वारा प्रमाणित की जाती है? किस आधार पर वेतन आहरित होता है? इन सवालों का जवाब भी जरूरी है।
जांच में मूल तैनाती, वर्तमान कार्यस्थल, संबद्धता आदेश, उपस्थिति रजिस्टर और वेतन आहरण का मिलान कराया जाना चाहिए। इससे यह भी सामने आएगा कि कर्मचारी वास्तव में किस स्थान पर और किस कार्य में लगाया गया है।
निजी कार्य कराने पर भी उठेंगे सवाल
यदि सफाईकर्मियों से अधिकारी के आवास पर घरेलू सामान लाने, भोजन तैयार करने या अन्य निजी कार्य कराए जा रहे हैं तो यह भी गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है कि क्या ऐसे कार्य सरकारी ड्यूटी का हिस्सा हैं?
सरकारी कर्मचारी से लिए जाने वाले कार्य और उसके पद से संबंधित जिम्मेदारियों की स्पष्टता जरूरी है। ऐसे मामलों में आदेश और जिम्मेदारी दोनों की जांच होनी चाहिए।
नौ ब्लॉक, लेकिन सवाल एक—गांवों की सफाई कौन करेगा?
चंदौली के सभी नौ विकासखंडों में ग्राम पंचायतों की सफाई व्यवस्था के लिए सफाईकर्मी तैनात हैं। अगर यही कर्मचारी कार्यालयों में बाबू, कंप्यूटर ऑपरेटर, चालक और अधिकारियों के सहयोगी के तौर पर लगाए जाएंगे तो गांवों में स्वच्छता व्यवस्था कैसे मजबूत होगी?
वेतन सफाईकर्मी का, कुर्सी बाबू की; नियुक्ति गांव की, ड्यूटी दफ्तर की—यह कैसा सरकारी सिस्टम है?
प्रशासन कराए भौतिक सत्यापन
जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग को सभी नौ विकासखंडों के साथ जिला मुख्यालय और विकास भवन में तैनात सफाईकर्मियों का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए।
प्रत्येक कर्मचारी की मूल तैनाती, वर्तमान कार्यस्थल, संबद्धता आदेश, आदेश की अवधि, उपस्थिति, वेतन आहरण और वर्तमान में लिए जा रहे कार्य का रिकॉर्ड खंगाला जाए।
साथ ही यह भी सामने आना चाहिए कि कितने सफाईकर्मी डाक रिसीव करने, फाइल संभालने, कंप्यूटर चलाने, सरकारी वाहन चलाने अथवा अधिकारियों के आवास से जुड़े कार्यों में लगाए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है जब गांवों की सफाई के लिए नियुक्त कर्मचारी ही जिला मुख्यालय से लेकर विकास भवन तक बाबूगिरी और साहब की सेवा में लगा है, तो गांवों में सफाई की अलख आखिर कौन जगाएगा?




