चकिया

गांधी जयंती पर शहाबगंज में विभागीय आदेश बेअसर, नौ बजे कार्यक्रम के निर्देश के बावजूद 10 बजे बाद तक बंद मिले विद्यालय

बीएसए के आदेश में माल्यार्पण से लेकर विद्यार्थियों के बीच गोष्ठी व वाद-विवाद तक के थे निर्देश, मौके की स्थिति ने खड़े किए सवाल

शहाबगंज। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर परिषदीय विद्यालयों में निर्धारित कार्यक्रम कराने को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। आदेश में 2 अक्टूबर को सुबह नौ बजे से विद्यालयों में गांधी जयंती समारोह आयोजित करने तथा शिक्षकों की उपस्थिति में विद्यार्थियों के बीच विभिन्न गतिविधियां कराने को कहा गया था। साथ ही कार्यक्रम की फोटो और वीडियो तैयार कर विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।
विभागीय आदेश के अनुसार सुबह नौ बजे महात्मा गांधी के चित्र का अनावरण एवं माल्यार्पण करने के बाद उनके जीवन-संघर्ष, देशसेवा और विचारों पर प्रकाश डालना था। विद्यार्थियों को सत्य, अहिंसा, सादगी, नैतिकता, मितव्ययिता और सद्भाव जैसे गांधीवादी मूल्यों की जानकारी देने के साथ वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं गोष्ठी आयोजित करने के निर्देश थे। इसके अलावा स्वच्छता, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, भावनात्मक एकता तथा कमजोर और वंचित वर्गों के कल्याण से जुड़ी गांधीवादी अवधारणाओं से भी विद्यार्थियों को परिचित कराने को कहा गया था।

आदेश नौ बजे का, 10 बजे के बाद भी विद्यालयों में ताले
इन निर्देशों के अनुपालन की जमीनी हकीकत जानने के लिए शहाबगंज विकासखंड में 2 अक्टूबर को विद्यालयों की स्थिति देखी गई। इस दौरान कई परिषदीय विद्यालय निर्धारित समय के काफी बाद तक बंद मिले।
प्राथमिक विद्यालय इलिया द्वितीय सुबह 10:11 बजे, प्राथमिक विद्यालय सावलसोत 10:15 बजे, प्राथमिक विद्यालय मालदह 10:19 बजे, प्राथमिक विद्यालय सिहर करीब 10:37 बजे तथा पूर्व माध्यमिक विद्यालय लेहरा खास 10:42 बजे बंद मिला।
मौके पर कुछ विद्यालयों की स्थिति ऐसी भी नजर आई कि उनके खुले होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब विभागीय आदेश के अनुसार कार्यक्रम सुबह नौ बजे से शुरू होना था तो इन विद्यालयों में उस समय शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद थे या नहीं।

क्या एक घंटे में ही निपटा दिए गए सभी कार्यक्रम?
विभागीय आदेश में केवल गांधी जी के चित्र पर माल्यार्पण तक कार्यक्रम सीमित नहीं था। विद्यार्थियों के बीच गांधी जी के जीवन एवं विचारों पर चर्चा, सत्य-अहिंसा, स्वच्छता, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और अन्य विषयों पर गतिविधियां कराने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में 10:11 से 10:42 बजे के बीच विद्यालयों के बंद मिलने से यह सवाल भी खड़ा होता है कि निर्धारित सभी कार्यक्रम आखिर किस समय और किस तरह आयोजित किए गए।
यदि कार्यक्रम सुबह नौ बजे शुरू किए गए थे तो क्या माल्यार्पण, गोष्ठी, वाद-विवाद और विद्यार्थियों को गांधीवादी विचारों की जानकारी देने सहित सभी गतिविधियां महज एक घंटे में पूरी कर ली गईं? और यदि कार्यक्रम बाद में हुए तो सुबह नौ बजे से आयोजन कराने के विभागीय निर्देश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ?

खंड शिक्षा अधिकारी की निगरानी पर भी सवाल
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश का विद्यालय स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित कराने और समय से कार्यक्रम आयोजित होने की निगरानी खंड शिक्षा अधिकारी स्तर से भी की जानी थी। ऐसे में शहाबगंज विकासखंड में 10 बजे के बाद तक कई विद्यालय बंद मिलने से खंड शिक्षा अधिकारी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभागीय आदेश में कार्यक्रम की फोटो और वीडियो विद्यालयवार तैयार कर उसी दिन शाम चार बजे तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे। अब इन विद्यालयों से उपलब्ध कराई गई फोटो-वीडियो और कार्यक्रम संबंधी अभिलेखों के सत्यापन से यह स्पष्ट हो सकता है कि निर्धारित गतिविधियां वास्तव में किस समय और किस प्रकार आयोजित की गईं।

इन सवालों के जवाब जरूरी
सुबह नौ बजे कार्यक्रम शुरू कराने के स्पष्ट निर्देश के बावजूद विद्यालय 10 बजे के बाद तक बंद क्यों मिले?
शहाबगंज विकासखंड में खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालयों में समय से कार्यक्रम शुरू होने की निगरानी क्यों नहीं की गई?
क्या सभी विद्यालयों की कार्यक्रम संबंधी फोटो-वीडियो का विभागीय स्तर पर सत्यापन किया गया?
निर्धारित समय पर विद्यालय न खुलने और कार्यक्रम के अनुपालन में कमी पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों से स्पष्टीकरण लेकर कार्रवाई कब होगी?
अब देखना यह है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्पष्ट निर्देश के बावजूद शहाबगंज विकासखंड में सामने आई इस स्थिति को विभाग किस गंभीरता से लेता है और संबंधित जिम्मेदारों से क्या जवाब-तलब किया जाता है।

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