शहाबगंज में विस्तारित बैठक कर जन जागरण अभियान और धान खरीद की लड़ाई तेज करने का लिया निर्णय
शहाबगंज (चंदौली)। जल, जंगल और जमीन की रक्षा, बुलडोजर राज समाप्त करने, गरीबों को बिजली की रोशनी उपलब्ध कराने और महंगाई के खिलाफ उत्तर प्रदेश किसान सभा व्यापक जन जागरण अभियान चलाएगी। इसके तहत आगामी 5 नवंबर को चकिया में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, 26 अक्टूबर को शहाबगंज क्षेत्र के हड़ौरा गांव में शहीद दिवस मनाया जाएगा। इन कार्यक्रमों की सफलता के लिए पूरे तहसील क्षेत्र में जन जागरण जत्था अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।
यह निर्णय शहाबगंज स्थित सहकारी समिति परिसर में किसान सभा की विस्तारित बैठक में लिया गया। बैठक को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला मंत्री लालचंद एडवोकेट ने कहा कि वर्तमान समय में गरीबों, किसानों और आम जनता के सामने महंगाई, बिजली सहित कई गंभीर समस्याएं हैं। जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा गरीबों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों को लेकर किसान सभा गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेगी और उन्हें आंदोलन से जोड़ेगी।
उन्होंने कहा कि 5 नवंबर को चकिया में होने वाला प्रदर्शन जनहित के विभिन्न मुद्दों को लेकर आयोजित किया जाएगा। इसके लिए तहसील क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की जाएगी। साथ ही किसानों की प्रमुख समस्या धान खरीद को सुनिश्चित कराने के लिए भी संघर्ष तेज किया जाएगा, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो और उन्हें उचित लाभ मिल सके।
बैठक में 26 अक्टूबर को हड़ौरा गांव में शहीद दिवस मनाने की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करने से ही समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी पहल की जा सकती है।
बैठक में जिला मंत्री लालचंद एडवोकेट ने पर्यवेक्षक के रूप में विचार रखे। किसान सभा के अध्यक्ष मंडल के स्वामीनाथ यादव, नंदलाल राम, अजय शेखर, बडेलाल, बदरू, ध्वजा रोहण अंसारी, प्रधान नीरज यादव, सोनू राम, चंद्रशेखर चौहान और जयप्रकाश विश्वकर्मा सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे। सभी ने किसान सभा के आगामी कार्यक्रमों को सफल बनाने और किसानों की समस्याओं को लेकर संघर्ष तेज करने की अपील की।
बैठक के अंत में जन जागरण अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने, चकिया में प्रस्तावित प्रदर्शन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा धान खरीद की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आंदोलन को मजबूत करने पर जोर दिया गया।



