खरौझा में श्रीराम कथा के प्रथम दिन उमड़ा आस्था का सैलाब
इलिया (चंदौली) : क्षेत्र के खरौझा गांव में हनुमान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नवदिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के प्रथम दिवस पर रविवार को पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो शाम होते-होते एक विशाल जनसमूह में बदल गई। भव्य पंडाल, सुसज्जित मंच और गूंजते भक्ति गीतों के बीच पूरा क्षेत्र “जय श्रीराम” के उद्घोष से गुंजायमान हो गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह द्वारा विधिवत पोथी पूजन एवं व्यासपीठ के पूजन के साथ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब कथा का आरंभ हुआ, तो वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा।
प्रथम निशा में मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने अपनी मधुर, ओजस्वी और भावपूर्ण वाणी से श्रीराम कथा का आरंभ किया। उन्होंने शुरुआत में ही श्रीरामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई “मिलहि न रघुपति बिना अनुरागा, किए जोग तप ज्ञान बिरागा” का गूढ़ और मार्मिक भावार्थ प्रस्तुत करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम की प्राप्ति केवल सच्चे प्रेम, समर्पण और निष्कलुष भाव से ही संभव है।

उन्होंने विस्तार से बताया कि आज के समय में लोग भक्ति के बाहरी रूपों में उलझ जाते हैं—कोई योग करता है, कोई तप करता है, कोई ज्ञान का प्रदर्शन करता है और कोई वैराग्य का दिखावा करता है। लेकिन जब तक मनुष्य के हृदय में प्रभु के प्रति सच्चा अनुराग नहीं होता, तब तक ये सभी साधन अधूरे रह जाते हैं। प्रभु को पाने का मार्ग सरल है, लेकिन इसके लिए हृदय की पवित्रता और सच्चे भाव की आवश्यकता होती है।
शालिनी त्रिपाठी ने अपने प्रवचन में रामायण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम ने सदैव प्रेम और भक्ति को ही सर्वोपरि माना। उन्होंने शबरी प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि शबरी ने न तो कोई बड़ा यज्ञ किया, न ही कठिन तपस्या, लेकिन अपने निष्कपट प्रेम और प्रतीक्षा के बल पर प्रभु श्रीराम को अपने आश्रम तक ले आईं। इसी प्रकार निषादराज और केवट ने भी अपने सेवा भाव और सच्चे प्रेम से प्रभु का सान्निध्य प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक पात्र नहीं हैं, बल्कि वे जीवन जीने की कला के आदर्श हैं। उनके जीवन में मर्यादा, त्याग, सत्य, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा का जो अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है, वह आज के समाज के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है। यदि मनुष्य अपने जीवन में राम के इन आदर्शों को अपनाए, तो न केवल उसका व्यक्तिगत जीवन सफल होगा, बल्कि समाज में भी शांति, प्रेम और सौहार्द स्थापित हो सकता है।
कथा के दौरान शालिनी त्रिपाठी ने अपने मधुर भजनों और भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती गई, श्रद्धालु भक्ति में डूबते चले गए और पूरा पंडाल बार-बार “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंजता रहा। कई श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।
कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया था। हनुमान सेवा समिति के सदस्यों द्वारा श्रद्धालुओं के बैठने, पेयजल और अन्य सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी, जिससे किसी को कोई असुविधा न हो।
इस अवसर पर अस्पताली सिंह, राजन सिंह, त्रिवेणी दुबे, छोटू सिंह, सिकंदर उपाध्याय, पीके सिंह, तारा, गुलजारी, रीना सहित हनुमान सेवा समिति के सदस्य एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कथा के अंत में आरती के साथ प्रथम दिवस का समापन हुआ, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
नवदिवसीय श्रीराम कथा के आगामी दिनों में भी विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।




