एक ओर बरसात, दूसरी ओर हॉटमिक्स बिछाने का काम जारी; गुणवत्ता पर उठे सवाल, लोगों ने मांगी तकनीकी जांच
चन्दौली एक्सप्रेस | शहाबगंज
अतायस्तगंज–मचवल मार्ग पर रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच डामरीकरण कार्य जारी है। इसे लेकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य के दौरान सड़क निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी मानकों का पालन होता नहीं दिख रहा। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
मौके पर एक ओर बारिश हो रही थी, वहीं दूसरी ओर हॉटमिक्स प्लांट से तैयार बिटुमिनस मिश्रण सड़क पर बिछाया जा रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या डामरीकरण के लिए आवश्यक मौसमीय एवं तकनीकी मानकों का समुचित पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की सतह की समुचित सफाई किए बिना ही डामरीकरण कराया जा रहा है। न ही बिटुमिन का छिड़काव दिखाई दे रहा है और न ही टैक कोट लगाया जा रहा है। इसके बावजूद सीधे प्रीमिक्स कारपेट बिछाया जा रहा है। जबकि टैक कोट पुरानी एवं नई परत के बीच मजबूत बॉन्डिंग स्थापित करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।
इसके अलावा गिट्टी के निर्धारित ग्रेडेशन, हॉटमिक्स के तापमान, सड़क की सतह के तापमान, सतह पर नमी, बिटुमिन की चिपकने की क्षमता तथा कंपेक्शन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। तकनीकी जानकारों के अनुसार यदि सतह पर नमी रहती है या लगातार वर्षा होती है तो बिटुमिन और एग्रीगेट के बीच आवश्यक बंधन प्रभावित हो सकता है, जिससे सड़क की गुणवत्ता एवं टिकाऊपन पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
लोगों का कहना है कि एमओआरटीएच के स्पेसिफिकेशन तथा लोक निर्माण विभाग के तकनीकी प्रावधानों के अनुसार डामरीकरण से पहले सड़क की पूरी सफाई, धूल-मिट्टी हटाना, बिटुमिन एवं टैक कोट का प्रयोग, स्वीकृत ग्रेडेशन वाली गिट्टी का उपयोग, हॉटमिक्स का निर्धारित तापमान बनाए रखना तथा अनुकूल मौसमीय परिस्थितियों में कार्य कराया जाना आवश्यक माना जाता है। इसके विपरीत बारिश के बीच कार्य होने से गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसी क्रम में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर विभाग की ऐसी क्या प्रशासनिक या तकनीकी आवश्यकता थी कि वर्षाकाल के बीच ही डामरीकरण कार्य कराया जा रहा है। यदि मौसम अनुकूल होने तक कार्य स्थगित कर दिया जाता तो गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों से बचा जा सकता था।
निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री, बिटुमिन की मात्रा, टैक कोट, गिट्टी के ग्रेडेशन, हॉटमिक्स के तापमान तथा गुणवत्ता नियंत्रण की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की भी मांग की गई है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी तरह मानकों के अनुरूप हो रहा है तो विभाग को इसकी निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे विकास कार्य की आखिर इतनी भी क्या जल्दी थी कि जुलाई की बरसात के बीच डामरीकरण कराना पड़ रहा है? क्या विभाग को यह अनुमान नहीं था कि इसी मौसम में लगातार बारिश होगी? यदि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं हो रहा है तो विभाग को स्वयं सामने आकर उठ रहे तकनीकी सवालों का जवाब देना चाहिए।
पक्ष: इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता कृष्ण कुमार से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।




