आल इंडिया मुशायरे में देशभर के शायरों ने बांधा समां, भोर तक जमी रही अदब की महफिल
शहाबगंज चंदौली: बड़गावां गांव में सोमवार की रात कुछ अलग ही नजारा था। यहां नफरत नहीं, मोहब्बत की बातें हो रही थीं… मंच से उठती हर आवाज एकता का संदेश दे रही थी… और हजारों की भीड़ पूरी रात शेरो-शायरी में डूबी रही।
मोहब्बत और एकता का संदेश, शेरों ने जीत लिया दिल

कौमी यकजहती फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित “एक शाम अबू बकर इंजीनियर सिद्दीकी के नाम” मुशायरे की शुरुआत ही ऐसे शेर से हुई जिसने हर दिल को छू लिया—
“नफरत की आंधियों में भी मोहब्बत का दिया जलाएंगे,
हम हिंदू-मुस्लिम मिलकर देश का नाम बढ़ाएंगे।”
इसके बाद पूरा माहौल तालियों और ‘वाह-वाह’ से गूंज उठा। देर रात से लेकर भोर तक लोग अपनी जगह से हिले तक नहीं।
जब हंसी, इश्क और देशभक्ति एक मंच पर आए, तो बंध गया समां

मुशायरे में डॉ. सबा बलरामपुरी ने इश्किया अंदाज से दिल जीता, तो दमदार बनारसी ने समसामयिक मुद्दों पर ऐसा व्यंग्य किया कि लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए।
रुबीना अयाज ने उर्दू की नजाकत पेश की, वहीं प्रतिभा यादव और रौशन हबीबा ने भावनाओं से भरपूर प्रस्तुति दी। सलमान जफर, डॉ. सुरेश अकेला, सुहैल उस्मानी, खुर्शीद हैदर, शारिक फूलपुरी और हर्षित मिश्रा ने भी अपने अंदाज से लोगों को बांधे रखा।
सम्मान और तालियों की गूंज से देर रात तक गुलजार रहा पंडाल

कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों और शायरों को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गड़गड़ाहट ने माहौल को और जीवंत बना दिया।
मुख्य अतिथि बोले— यही है भारत की असली पहचान
मुख्य अतिथि चकिया चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव ने कहा कि यह मुशायरा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे की जीवंत तस्वीर है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं।
बड़ी संख्या में जुटे लोग, भोर तक चलता रहा कार्यक्रम

अवसर पर मुख्य रूप से पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एड. हमीदुल्ला अंसारी,शीतला राय,अनिल केशरी,मुस्ताक अहमद,अशरफ जमाल,जमील अहमद,शाहनवाज अहमद,अनिल केशरी,गुलफाम अहमद मिक्कू,उस्मान गनी बबलू,अयूब खां,अनीस खान,इरफान अहमद,विनोद सिंह,इबरार अली,सद्दाम खान,मिथिलेश,आदि मौजूद थे।मुशायरा की अध्यक्षता अबू बकर सिद्दीकी व संचालन नसीम साज ने किया।अतिथियों का स्वागत आयोजक कय्यूम खां कम्मू,मुश्ताक अहमद व अशरफ जमाल ने किया।




