33/11 उपकेंद्र की लचर व्यवस्था से चार फीडर प्रभावित, रातभर अंधेरे में गुजर रही लोगों की जिंदगी
शहाबगंज (चंदौली):
जनपद के शहाबगंज क्षेत्र में इन दिनों बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भीषण गर्मी के बीच हो रही अघोषित और लगातार बिजली कटौती ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि दिन में भी बिजली का कोई भरोसा नहीं, और रात होते ही कटौती का सिलसिला और तेज हो जाता है।
⚡ 33/11 उपकेंद्र बना परेशानी की जड़
शहाबगंज के 33/11 विद्युत उपकेंद्र से जुड़े पचवनियां, राममाड़ो, शहाबगंज और भूसी फीडर के उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पहले गेहूं कटाई के नाम पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कटौती की जा रही थी, लेकिन अब कटाई खत्म होने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
रातभर अंधेरे में गुजर रही जिंदगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर शाम को बिजली आती भी है, तो रात 8 बजे के बाद बार-बार कटौती शुरू हो जाती है, जो सुबह 6 बजे तक जारी रहती है। उमस भरी गर्मी में बिना बिजली के रात काटना लोगों के लिए किसी सजा से कम नहीं है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं।
गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें, पानी का भी संकट
भीषण गर्मी में बिजली न रहने से कूलर-पंखे बंद पड़े हैं, वहीं जलापूर्ति भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप और मोटर पर निर्भर लोग पानी के लिए भी जूझ रहे हैं। लोगों का कहना है कि बिजली कटौती ने उनकी दिनचर्या पूरी तरह बिगाड़ दी है।
तस्वीर बयां कर रही दर्द
इस खबर के साथ लगी तस्वीर खुद शहाबगंज की हकीकत बयान कर रही है—एक तरफ जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि, तो दूसरी तरफ अंधेरे में बैठा परेशान परिवार। यह तस्वीर साफ दिखाती है कि समस्या कितनी गंभीर है और इसका असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है।
जनता का फूटा गुस्सा
क्षेत्रीय लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब सरकार 18 घंटे बिजली देने का दावा करती है, तो शहाबगंज में ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है? बार-बार शिकायत के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा है।
DM और विधायक से सीधी मांग
क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग और चकिया के विधायक कैलाश आचार्य से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों ने कहा कि अगर जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब प्रशासन की परीक्षा
शहाबगंज की जनता अब राहत का इंतजार कर रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक लोग इस भीषण गर्मी में अंधेरे और परेशानियों के बीच जीने को मजबूर रहेंगे? अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना।




