चकिया

सैदूपुर में गूंजा बुद्ध का संदेश

त्रिशरण और पंचशील के मार्ग पर चलने का आह्वान

इलिया, चंदौली। बुद्ध विहार महामाया सरोवर सैदूपुर के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय सनातनी बुद्ध धर्म देशना कथा के प्रथम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में बोधगया से पधारी कथावाचिका भन्ते बंदना ने भगवान बुद्ध के उपदेशों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को त्रिशरण और पंचशील के महत्व से अवगत कराया।

देशना कथा के दौरान भन्ते बंदना ने कहा कि भगवान बुद्ध का धम्म केवल एक धर्म नहीं बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला जीवन दर्शन है। उन्होंने बताया कि त्रिशरण का अर्थ बुद्ध, धम्म और संघ की शरण ग्रहण करना है। “बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि और संघं शरणं गच्छामि” का भाव व्यक्ति को सत्य, अहिंसा, करुणा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करता है। यही मार्ग जीवन के दुखों और कष्टों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने मानवता को प्रेम, दया, करुणा और भाईचारे का संदेश दिया। उनके बताए मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सुखी, शांतिपूर्ण और सार्थक बना सकता है। समाज में बढ़ती हिंसा, वैमनस्य और नैतिक पतन को रोकने के लिए बुद्ध के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।

कथावाचिका ने पंचशील की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को पांच संकल्प अवश्य लेने चाहिए। इनमें जीव हत्या न करना, चोरी न करना, व्यभिचार से दूर रहना, असत्य भाषण न करना तथा किसी भी प्रकार के नशे का सेवन न करना शामिल है। उन्होंने कहा कि पंचशील केवल धार्मिक नियम नहीं बल्कि मानव जीवन को अनुशासित, नैतिक और आदर्श बनाने वाले सिद्धांत हैं।
भन्ते बंदना ने कहा कि वर्तमान समय में चोरी, बलात्कार, हत्या, हिंसा और अन्य सामाजिक अपराधों में वृद्धि चिंताजनक है। यदि समाज के लोग भगवान बुद्ध के विचारों और पंचशील के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार लें तो सामाजिक बुराइयों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। इससे समाज में शांति, सद्भाव, भाईचारा और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना होगी।

देशना कथा के दौरान श्रद्धालु बुद्ध वंदना, धम्म गीतों और भक्ति संगीत में भावविभोर दिखाई दिए। पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के उपदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मनगोई बौद्ध, गौरीशंकर मौर्य, लालजी, नंदलाल, लोकपति मौर्य, रामअवतार मौर्य, जितेंद्र कुमार, नंदलाल शास्त्री सहित बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी, श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि पांच दिवसीय कथा के दौरान प्रतिदिन भगवान बुद्ध के जीवन, धम्म और मानव कल्याण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।

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