क्या कमीशन के आगे नहीं दिख रही वित्तीय अनियमितता? आखिर कौन दे रहा बार-बार स्वीकृति?
चंदौली एक्सप्रेस | शहाबगंज
शहाबगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत घोड़सारी में मनरेगा कार्यों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि एक ही कार्यस्थल को अलग-अलग नामों से दर्शाकर बार-बार कार्य स्वीकृत कराए जा रहे हैं, लाखों रुपये के प्राकलन तैयार किए जा रहे हैं और भुगतान भी कराया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्यस्थल और क्षेत्र लगभग एक ही हैं तो आखिर बार-बार एनओसी, तकनीकी स्वीकृति और प्राकलन कैसे जारी हो रहे हैं?

ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा में कार्यों की डबलिंग और ट्रिपलिंग का खेल लंबे समय से चल रहा है। आरोपों के केंद्र में ग्राम रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक (टीए) की भूमिका भी है। लोगों का कहना है कि बिना जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के एक ही स्थल पर बार-बार स्वीकृति मिलना संभव नहीं है।

जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में संतोष सिंह के खेत से घोड़सारी पुल तक माइनर की पटरी पर मिट्टी कार्य के नाम पर लगभग 4.62 लाख रुपये का भुगतान हुआ। इसके बाद उसी क्षेत्र में इमिलिया रेगुलेटर से सोनू सिंह के खेत तक बाहा के डौला पर मिट्टी कार्य की अलग आईडी बनाकर लगभग 3.42 लाख रुपये का भुगतान कराया गया।

यही नहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज बहादुर के खेत से अवधेश राम के खेत तक चकरोड पर मिट्टी कार्य के नाम से तीसरी आईडी स्वीकृत कर लगभग 7.79 लाख रुपये का प्राकलन तैयार कराया गया है, जिस पर वर्तमान में ऑनलाइन मस्टररोल भी संचालित है।
मामला यहीं नहीं रुकता। वर्ष 2023-24 में इमिलिया शेड से राकेश सिंह के खेत तक माइनर की पटरी पर मिट्टी कार्य पर लगभग 2.80 लाख रुपये खर्च किए गए थे। आरोप है कि उसी कार्यस्थल को नया नाम देकर वर्ष 2026-27 में छांगुर दुबे के खेत से ठाकुर जी के खेत तक डौला पर मिट्टी कार्य स्वीकृत करा लिया गया और करीब 8.42 लाख रुपये का प्राकलन भी तैयार हो गया।

इसके अलावा वर्ष 2024-25 में राधे दुबे के खेत से इमिलिया पुलिया तक नाला की पटरी पर मिट्टी कार्य पर लगभग 4.91 लाख रुपये खर्च किए गए। वहीं क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत द्वारा इसी क्षेत्र में बेचन प्रजापति के खेत से रेखा सिंह के खेत तक मिट्टी एवं खड़ंजा कार्य, लल्लन के खेत से जयनाथ के खेत तक इंटरलॉकिंग तथा राजेश के खेत से जयनाथ के खेत तक इंटरलॉकिंग कार्य भी कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद आरोप है कि उसी स्थल को नया नाम देकर वित्तीय वर्ष 2026 27 में बेचन सिंह के खेत से घोड़सारी पुलिया तक डौला पर मिट्टी कार्य की स्वीकृति लेकर लगभग 8.23 लाख रुपये का प्राकलन तैयार कर दिया गया है और ऑनलाइन मस्टररोल भी चल रहा है।

घोड़सारी में मनरेगा कार्यों को लेकर उठ रहे सवाल अब सीधे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। एक ही कार्यस्थल पर बार-बार एनओसी, बार-बार प्राकलन और बार-बार स्वीकृति आखिर किसके संरक्षण में मिल रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को पुराने कार्य दिखाई नहीं दे रहे, या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है? यदि आरोप सही हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी धन की खुली लूट का मामला हो सकता है। अब देखना यह है कि जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है या फिर वास्तव में जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई की आंच पहुंचती है।

घोड़सारी में मनरेगा कार्यों को लेकर उठ रहे सवाल अब सीधे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। एक ही कार्यस्थल पर बार-बार एनओसी, बार-बार प्राकलन और बार-बार स्वीकृति आखिर किसके संरक्षण में मिल रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को पुराने कार्य दिखाई नहीं दे रहे, या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है? यदि आरोप सही हैं तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सरकारी धन की खुली लूट का मामला हो सकता है। अब देखना यह है कि जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है या फिर वास्तव में जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई की आंच पहुंचती है।



ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एक ही स्थल पर अलग-अलग नामों से बार-बार कार्य स्वीकृत हुए हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है। ग्रामीणों ने संबंधित कार्यों की एनओसी, तकनीकी स्वीकृति, प्राकलन और भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की मांग की है।




