एनएमएमएस ऐप की आड़ में मनरेगा में गड़बड़ी की आशंका, पारदर्शिता पर उठे सवाल
चंदौली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लागू किए गए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा है कि कुछ लोग कथित तौर पर रुपये लेकर अनधिकृत या क्लोन NMMS ऐप उपलब्ध करा रहे हैं, जिसके जरिए नियमों के विपरीत हाजिरी दर्ज कराने का खेल चल रहा है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की विश्वसनीयता पर भी सीधा प्रभाव पड़ेगा।
मनरेगा में कार्यरत मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति दर्ज करने के उद्देश्य से NMMS ऐप को लागू किया गया था। इस व्यवस्था के तहत कार्यस्थल पर मजदूरों की फोटो और लोकेशन के आधार पर हाजिरी दर्ज की जाती है ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके। लेकिन अब आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ बिचौलिये तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर या कथित रूप से क्लोन ऐप के माध्यम से फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने के तरीके बता रहे हैं। इससे योजना के मूल उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है।

फर्जी हाजिरी से सरकारी धन के दुरुपयोग का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी स्तर पर अनधिकृत ऐप या तकनीकी छेड़छाड़ के माध्यम से हाजिरी दर्ज की जाती है तो इससे वास्तविक मजदूरों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही ऐसे मामलों में सरकारी धन गलत व्यक्तियों तक पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है। मनरेगा जैसी श्रम आधारित योजना में उपस्थिति का सही रिकॉर्ड अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि भुगतान उसी आधार पर किया जाता है।
ग्रामीण इलाकों में यह भी चर्चा है कि कुछ लोग कथित तौर पर पैसे लेकर ऐसे ऐप या तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कार्यस्थल पर मौजूद हुए बिना भी हाजिरी दर्ज की जा सके। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रही शिकायतों ने प्रशासनिक तंत्र की चिंता बढ़ा दी है।
प्रशासन की नजर, कार्रवाई की मांग तेज
सूत्रों के अनुसार विभिन्न राज्यों में प्रशासनिक स्तर पर NMMS प्रणाली में संभावित हेरफेर और फर्जी हाजिरी के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा समय-समय पर यह स्पष्ट किया जाता रहा है कि केवल अधिकृत एनएमएमएस ऐप का ही उपयोग किया जाए और किसी भी प्रकार के अनधिकृत सॉफ्टवेयर या क्लोन ऐप का इस्तेमाल दंडनीय हो सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही फर्जी ऐप बेचने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं में जनता का विश्वास कायम रह सके। यदि समय रहते इस पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए विकसित की गई डिजिटल व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ सकती है।




