शहाबगंज पुलिस ने पांच सदस्यीय चोर गिरोह पकड़ा, प्रेस नोट में 2026 की जगह 2035 लिखने से उठे सवाल
शहाबगंज (चंदौली)।
शहाबगंज पुलिस ने चोरी की कई घटनाओं का खुलासा करते हुए पांच सदस्यीय शातिर चोर गिरोह को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से चोरी की दो मोटरसाइकिलें तथा चोरी के पैसों से खरीदा गया एक आईफोन 17 प्रो बरामद किया है। हालांकि इस कार्रवाई से अधिक चर्चा पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट में हुई बड़ी लापरवाही की हो रही है। प्रेस नोट में एक मुकदमे का वर्ष 2026 के स्थान पर 2035 अंकित कर दिया गया, जबकि वर्ष 2035 अभी आया ही नहीं है। इससे प्रेस नोट की जांच-पड़ताल और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस के अनुसार 29 जून की रात जेंगुरी ईंट भट्ठे के पास चेकिंग के दौरान पांचों आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि उन्होंने विशुनपुरा, मानिकपुर और मैढ़ी गांवों में बंद मकानों को निशाना बनाकर नकदी और आभूषणों की चोरी की थी। चोरी के आभूषणों को वाराणसी के चौक गोविंदपुर क्षेत्र में बेचकर करीब साढ़े तीन लाख रुपये प्राप्त किए गए। इसी रकम से एक नई पल्सर मोटरसाइकिल और आईफोन 17 प्रो खरीदा गया, जबकि शेष धनराशि खर्च कर दी गई।

बरामदगी में बिना नंबर प्लेट की एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल, एक नई पल्सर मोटरसाइकिल तथा एक आईफोन 17 प्रो शामिल है। पुलिस ने सभी आरोपितों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में कार्रवाई करते हुए न्यायालय भेज दिया है।
लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई के बीच उसके आधिकारिक प्रेस नोट में दर्ज गंभीर त्रुटि चर्चा का विषय बन गई है। प्रेस नोट में दर्ज मुकदमे के विवरण में “मु0अ0सं0 29/2035” लिखा गया है, जबकि यही त्रुटि प्रेस नोट में एक से अधिक स्थानों पर दोहराई गई है। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस द्वारा प्रेस नोट जारी करने से पहले उसका तथ्यात्मक परीक्षण किया जाता है या नहीं।
आमजन का कहना है कि पुलिस का प्रेस नोट आधिकारिक दस्तावेज माना जाता है, जिसके आधार पर समाचार प्रकाशित किए जाते हैं। ऐसे में इस प्रकार की लापरवाही से गलत सूचनाएं प्रसारित होने की आशंका बढ़ जाती है। लोगों ने भविष्य में प्रेस नोट जारी करने से पहले उसकी सावधानीपूर्वक जांच कराने की मांग की है।




