शहाबगंज विकास खंड में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, ग्रामीण बोले—”हमारे गांव का सफाई कर्मी आखिर है कौन ?
चन्दौली एक्सप्रेस | शहाबगंज चंदौली
शहाबगंज विकास खंड की कई ग्राम पंचायतों में इन दिनों एक नया रहस्य चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में नियुक्त सफाई कर्मी आज तक दिखाई ही नहीं दिए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर गांव का सफाई कर्मी है कौन, और यदि है तो ड्यूटी कहां करता है?
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की नालियां और रास्ते अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं, लेकिन कागजों में सफाई व्यवस्था शायद पूरी तरह “चमक” रही है। यही वजह है कि अब लोग पूछने लगे हैं कि जब कर्मचारी गांव नहीं आते, तो उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर कौन करता है? आखिर किस आधार पर हर महीने वेतन निर्गत हो जाता है? जब कि सभी गांवों से पे-रोल प्रधान व सचिव द्वारा भरकर जमा किया जाता है। तो ऐसे सफाई कर्मियों का पैरोल पर सिग्नेचर करने वाला जिम्मेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।
क्षेत्र में चर्चा है कि कई ग्राम पंचायतों में तैनात सफाई कर्मी नियमित रूप से गांव में नजर नहीं आते। ग्रामीणों ने तैयारी ग्राम पंचायत में तैनात अशोक चतुर्वेदी, देवेंद्र मिश्रा तथा इलिया ग्राम पंचायत में तैनात प्रेम किशोर सिंह सहित कुछ अन्य कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी महीनों तक गांव में दिखाई नहीं देता, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा उसकी कार्यप्रणाली की समीक्षा क्यों नहीं की जाती? क्या उपस्थिति का सत्यापन होता है? यदि होता है, तो किस स्तर पर?
अब लोगों की मांग है कि पूरे विकास खंड के सभी सफाई कर्मियों की तैनाती, वास्तविक उपस्थिति, कार्यस्थल और वेतन भुगतान की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है, तो स्थिति स्पष्ट कर जनता का भ्रम दूर किया जाए, और यदि कहीं अनियमितता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
चन्दौली एक्सप्रेस का सवाल:
क्या शहाबगंज विकास खंड में सफाई कर्मी धरातल पर काम कर रहे हैं, या केवल सरकारी अभिलेखों में ही उनकी मौजूदगी दर्ज है? इस सवाल का जवाब अब जांच और प्रशासनिक पारदर्शिता ही दे सकती है।
एडीओ पंचायत अरविंद कुमार ने बताया कि तियरी में तैनात दोनों सफाई कर्मी अपने स्थान पर किसी को जिम्मेदारी दिया है और कभी नहीं आता। बुद्धिजीवी मानते हैं कि आखिरकार इसका दोषी सिस्टम है या कोई और।




