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बाढ़ में डूबा शहाबगंज, वीबीजीरामजी का ‘विकास’ तैरता मिला!

अरारी में नाली खुदाई का मस्टरोल जारी, NMMS पर हाजिरी दर्ज—चारों तरफ पानी, फिर भी कागजों पर मजदूरों के फावड़े चल रहे हैं! बीडीओ दिनेश सिंह की निगरानी पर भी बड़ा सवाल

चन्दौली एक्सप्रेस | शहाबगंज। शहाबगंज में आसमान कई दिनों से खुलकर बरस रहा है। खेतों में पानी, सिवानों में जलभराव, रास्तों पर कीचड़ और गांवों में बाढ़ जैसे हालात हैं। ग्रामीण पानी निकासी के लिए परेशान हैं, लेकिन इसी बीच वीबीजीरामजी के रिकॉर्ड में विकास की ऐसी गंगा बह रही है कि देखकर लगता है बारिश ने मजदूरों के फावड़े नहीं, सरकारी पोर्टल की रफ्तार बढ़ा दी है। अरारी गांव में नाली खुदाई का मस्टरोल जारी होने और NMMS पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी दर्ज होने की बात सामने आई है। अब सवाल यह है कि जब चारों तरफ पानी ही पानी है, तो आखिर नाली खुदाई किस जमीन पर हो रही है? मजदूर अगर सचमुच काम पर पहुंच रहे हैं तो इस बारिश में उनके फावड़े कहां चल रहे हैं और काम की मिट्टी आखिर कहां दिखाई दे रही है? कहावत है ‘कागज का घोड़ा दौड़ता बहुत है, लेकिन मैदान में उसकी टाप सुनाई नहीं देती।’

शहाबगंज के इस मामले में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई देने का आरोप ग्रामीण लगा रहे हैं—पोर्टल पर हाजिरी दौड़ रही है, मगर मौके पर काम की तलाश है। वीबीरामजी कार्यों की निगरानी से जुड़े सेक्रेटरी और तकनीकी सहायक से यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या उन्होंने मस्टरोल चलाने से पहले और हाजिरी दर्ज होने के दौरान मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखी? अगर देखी तो बारिश और जलभराव के बीच नाली खुदाई का काम कहां मिला और कितने मजदूर मिले? और यदि स्थलीय निरीक्षण नहीं हुआ तो फिर हाजिरी और कार्य की पुष्टि किस आधार पर हुई? इससे भी बड़ा सवाल विकास खंड की निगरानी व्यवस्था पर है।

बीडीओ दिनेश सिंह के नेतृत्व में चल रही मॉनिटरिंग आखिर इतनी मजबूत है कि पानी जमीन पर कब्जा किए हुए है और वीबीजीरामजी का काम रिकॉर्ड में बेधड़क जारी है, या फिर निगरानी भी सरकारी पोर्टल की स्क्रीन तक सिमट गई है? यदि अधिकारी मौके पर जाकर काम का सत्यापन कर रहे हैं तो इसकी तस्वीर और वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए, क्योंकि बारिश के बीच चल रहे वीबीरामजी कार्यों का सत्यापन किसी दफ्तर की कुर्सी पर बैठकर नहीं, बल्कि उसी पानी और कीचड़ के बीच जाकर ही संभव है। ग्रामीणों का आरोप है कि शहाबगंज के कई गांवों में वृक्षारोपण के नाम पर भी कागजों में हरियाली दिखाई जा रही है। ऐसे में सवाल और दिलचस्प हो जाता है—गांव में पानी खड़ा है, पोर्टल पर मजदूर खड़े हैं और रिकॉर्ड में पौधे खड़े हैं, बस अधिकारी मौके पर कब खड़े होंगे? आखिर सरकारी धन जनता की मेहनत की कमाई से आता है और उसकी एक-एक पाई का हिसाब जमीन पर दिखाई देना चाहिए। यदि अरारी में नाली खुदाई वास्तव में हुई है तो जांच के बाद स्थिति साफ हो जाएगी और यदि मस्टरोल व NMMS की हाजिरी वास्तविक काम से मेल नहीं खाती तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। ग्रामीणों ने अरारी सहित पूरे विकास क्षेत्र में चल रहे वीबीरामजी कार्यों की स्थलीय जांच, मस्टरोल और NMMS हाजिरी का मजदूरों से मिलान तथा वृक्षारोपण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। क्योंकि बारिश का पानी तो कुछ दिनों में उतर जाएगा, लेकिन अगर कागजों पर बहता विकास जमीन तक नहीं पहुंचा तो सवालों का पानी अधिकारियों के रिकॉर्ड में लंबे समय तक जमा रहेगा। अब देखना यह है कि बीडीओ दिनेश सिंह और संबंधित जिम्मेदार कर्मचारी इन सवालों का जवाब फाइल से देते हैं या मौके पर जाकर देते हैं।

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