शहाबगंज में स्वास्थ्य सुविधाएं खुद इलाज की मोहताज,विधायक के निर्देश के बाद भी मशीन नहीं हुई चालू
शहाबगंज,चंदौली।
किसी भी देश की तरक्की का असली पैमाना केवल चमचमाती सड़कें,बड़े-बड़े पुल और विदेशों में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकें नहीं हैं।असली विकास तब दिखाई देता है,जब आम आदमी को बीमारी की हालत में समय पर डॉक्टर,जांच,दवा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।लेकिन शहाबगंज क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर इस कसौटी पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
चीन के सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए एक मामले में बताया गया कि वहां एक भारतीय दंपत्ति को अस्पताल में पंजीकरण, चिकित्सकीय परामर्श,रक्त जांच,रिपोर्ट और दवा की सुविधा करीब डेढ़ घंटे में मिल गई।यह उदाहरण भले ही चीन की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रतिनिधित्व न करता हो,लेकिन इससे भारत की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त देरी और अव्यवस्था पर सवाल जरूर उठते हैं।
वहीं चंदौली जिले के शहाबगंज क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है।क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करीब 15 वर्षों से तैयार पड़ा है,लेकिन इसके बावजूद इसका नियमित संचालन आज तक शुरू नहीं हो सका है।करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी भवन और उससे जुड़ी सुविधाओं का पूरा लाभ क्षेत्र की जनता को नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी क्षमता के साथ संचालित हो जाए तो शहाबगंज क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल या वाराणसी की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।गंभीर मरीजों और गरीब परिवारों के लिए यह सुविधा किसी बड़ी राहत से कम नहीं होगी।शहाबगंज
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य जांच को आसान और आधुनिक बनाने के लिए हेल्थ एटीएम मशीन भी करीब एक वर्ष से पड़ी हुई है,लेकिन अब तक इसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है।मशीन अस्पताल परिसर में रखे-रखे शोपीस बन गई है।हेल्थ एटीएम के जरिए सामान्य स्वास्थ्य जांच की कई सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद थी
इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी जांच के लिए निजी पैथोलॉजी सेंटरों का सहारा लेने से राहत मिल सकती थी।लेकिन मशीन के चालू न होने से सरकारी सुविधा का उद्देश्य ही अधूरा रह गया है।सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने भी करीब एक माह पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मोबाइल पर वार्ता कर हेल्थ एटीएम को चालू कराने का निर्देश दिया था।उस समय सीएमओ की ओर से एक सप्ताह के भीतर मशीन शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था।इसके बावजूद निर्धारित समय बीतने के बाद भी मशीन चालू नहीं हो सकी।सवाल यह कि सरकारी मशीनें कब काम करेंगी?शहाबगंज के ग्रामीणों के सामने सवाल सिर्फ एक मशीन का नहीं है।सवाल उस पूरी व्यवस्था का है जिसमें स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भवन बन जाते हैं, आधुनिक मशीनें अस्पताल पहुंच जाती हैं,लेकिन उनके संचालन के लिए जरूरी व्यवस्था समय पर नहीं हो पाती।एक ओर सरकार डिजिटल और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की बात करती है,वहीं दूसरी ओर अस्पताल में पहुंची मशीन का लंबे समय तक बंद पड़ा रहना व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।
।ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी किसी अधिकारी की फाइल की तरह इंतजार नहीं करती।मरीज को उसी समय जांच और उपचार चाहिए,जब वह अस्पताल पहुंचता है।गरीब परिवार के लिए एक दिन अस्पताल के चक्कर लगाना भी मजदूरी और रोजी-रोटी के नुकसान का कारण बनता है।




