25 हजार के मानदेय में तियरा का आवेदन, 9,600 में अमांव और 10,067 में सिंघरौल का वाउचर; अलग-अलग भुगतानों में दस्तावेजों की तस्वीर ने खड़े किए सवाल
चन्दौली एक्सप्रेस, शहाबगंज। शहाबगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत हाटा में ई-ग्रामस्वराज पर दर्ज भुगतानों और उनके साथ अपलोड अभिलेखों की पड़ताल में ऐसे कई मामले दिखाई दे रहे हैं, जहां भुगतान हाटा का है, लेकिन साथ लगे दस्तावेज दूसरे ग्राम पंचायतों के नजर आ रहे हैं। कहीं भुगतान और बिल-वाउचर की राशि अलग है तो कहीं एक ही प्रार्थना पत्र अलग-अलग भुगतानों में दोहराया गया है। ऑनलाइन अभिलेखों में दिखाई दे रही इन विसंगतियों का मूल दस्तावेजों और मौके के कार्य से मिलान जरूरी है।
25 हजार का भुगतान, आवेदन तियरा का
प्रधान के जुलाई से नवंबर 2025 के मानदेय के नाम पर कल्पना चौहान के नाम 25 हजार रुपये का भुगतान दिखाई देता है। इसके साथ अपलोड प्रार्थना पत्र पर लिखा नजर आता है—
“ग्राम प्रधान/सचिव, ग्राम पंचायत तियरा, शहाबगंज।
अवगत कराना है कि मेरा मानदेय जनवरी 2026 का अवशेष है, कृपा करें।”
इसके बाद दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के प्रधान मानदेय के 20 हजार रुपये के भुगतान में भी यही प्रार्थना पत्र दिखाई देता है। पंचायत सहायक के जनवरी से मार्च 2026 के 18 हजार रुपये के भुगतान में भी यही तियरा वाला आवेदन नजर आता है।
तीन अलग-अलग भुगतान और एक ही दूसरे ग्राम पंचायत का आवेदन—सवाल दस्तावेज के सत्यापन पर है।
पचपरा का आवेदन भी हाटा के भुगतान में!
अप्रैल 2026 में पंचायत सहायक के मानदेय के नाम पर बंदना के नाम 6 हजार रुपये का भुगतान दिखाई देता है। इसके साथ अपलोड प्रार्थना पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा दिखाई देता है—
“सेवा में, ग्राम प्रधान/ सचिव, ग्राम पचायत पचपरा, शहाबगंज, चन्दौली।
महोदय, अवगत कराना है कि मेरा मानदेय माह 2026 का अवशेष है। मानदेय लगवाने की कृपा करें।”
यानी भुगतान हाटा ग्राम पंचायत का, जबकि प्रार्थना पत्र ग्राम पंचायत पचपरा के नाम संबोधित है। यदि यह आवेदन वास्तव में किसी अन्य ग्राम पंचायत से संबंधित है तो हाटा के भुगतान के साथ इसे किस आधार पर अपलोड किया गया, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है। वहीं आवेदन में मानदेय की अवधि भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखाई देती,
ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि हाटा के भुगतान के साथ पंचपरा का आवेदन किस आधार पर अपलोड हुआ।

अमांव का बिल-वाउचर, हाटा का भुगतान
हाटा ग्राम पंचायत में जीएसटी एवं टैन पंजीकरण शुल्क के नाम पर 9,600 रुपये का भुगतान दिखाई देता है, जबकि इसके साथ ग्राम पंचायत अमांव का बिल-वाउचर अपलोड नजर आता है। वाउचर की कुछ जानकारी स्पष्ट रूप से पढ़ी नहीं जा रही है।
वहीं सामुदायिक शौचालय पर सफाई सामग्री के नाम पर पूर्वांचल इंटरप्राइजेज को 10,067 रुपये का भुगतान दिखाई देता है, लेकिन इसके साथ ग्राम पंचायत सिंघरौल का बिल-वाउचर अपलोड नजर आता है।
2,218 की कटौती, माप पुस्तिका में 2,240
विभिन्न स्थलों पर पाइप कार्य के कंसल्टिंग चार्ज के नाम पर अजय गौतम के नाम 2,218 रुपये की कटौती/भुगतान दिखाई देता है। अपलोड माप पुस्तिका में कंसल्टिंग चार्ज 2,240 रुपये तथा लेबर, सामग्री और कंसल्टिंग चार्ज सहित 1,14,241 रुपये का कुल योग दिखाई देता है। यही फोटो दो बार अपलोड होने की बात भी सामने आई है।
टेंडर का भुगतान 3,817, तकनीकी स्वीकृति तियरा की
ग्राम पंचायत कार्य हेतु टेंडर के नाम पर भारत एकता टाइम्स को 3,817 रुपये का भुगतान दिखाई देता है। इसके साथ अपलोड तकनीकी स्वीकृति में 1,87,000 रुपये की राशि दर्ज है। दस्तावेज पर ग्राम पंचायत तियरा की मुहर और प्रधान लाल बरत के हस्ताक्षर दिखाई देते हैं।
हाटा के भुगतान के साथ तियरा की तकनीकी स्वीकृति का दस्तावेज किस आधार पर लगा, यह भी मूल अभिलेखों से सत्यापन का विषय है।
मई में 82,442 का भुगतान, वाउचर में 1,03,562.53 रुपये
18 मई 2026 को वाउचर संख्या XVFC/2026-27/P/6 के तहत पूर्वांचल इंटरप्राइजेज के नाम 82,442 रुपये का भुगतान दिखाई देता है। इसके साथ वाउचर संख्या 163 का बिल-वाउचर अपलोड है, जबकि उसमें 1,03,562.53 रुपये का उल्लेख दिखाई देता है।
यानी ऑनलाइन भुगतान और अपलोड बिल-वाउचर की राशि में 21,120.53 रुपये का अंतर है। इसका कारण मूल बिल, माप पुस्तिका और भुगतान स्वीकृति के मिलान से ही स्पष्ट हो सकता है।
मजदूरी 25,200, लेबर शीट 40,050 की
राकेश के घर से चकरोड़ तक नाली सीसी कार्य में मजदूरी के नाम पर 25,200 रुपये का भुगतान दिखाई देता है। इसमें चार मजदूरों को 6,300-6,300 रुपये दिए जाने का विवरण है, जबकि अपलोड लेबर शीट में 40,050 रुपये की राशि दिखाई देती है।
इसी कार्य में पूर्वांचल इंटरप्राइजेज के नाम 42,474 रुपये का भुगतान दिखाई देता है, जबकि अपलोड बिल-वाउचर में 48,426 रुपये का कुल योग नजर आता है।
भुगतान केडीआर का, बिल फॉर साईं इंटरप्राइजेज का
कॉटेज एवं वाई-फाई रिचार्ज, पेपर रजिस्टर आदि के नाम पर केडीआर इंटरप्राइजेज को 9,200 रुपये का भुगतान दिखाई देता है। इसके साथ अपलोड बिल-वाउचर पर तियरा का विवरण दिखाई देता है और उस पर “फॉर साईं इंटरप्राइजेज” अंकित नजर आता है।
यानी ऑनलाइन भुगतान एक फर्म के नाम और बिल-वाउचर दूसरी फर्म के नाम का दिखाई दे रहा है। किस बिल के आधार पर भुगतान किया गया, इसकी पुष्टि मूल अभिलेखों से जरूरी है।
केयरटेकर के 18 हजार में भी वही तियरा का आवेदन
केयरटेकर समूह के जनवरी से मार्च के मानदेय के नाम पर डीह बाबा स्वयं सहायता समूह को 18 हजार रुपये का भुगतान दिखाई देता है। इसके साथ भी वही तियरा ग्राम पंचायत
ग्राम प्रधान/सचिव, ग्राम पंचायत तियरा, शहाबगंज।*
अवगत कराना है कि मेरा मानदेय जनवरी 2026 का अवशेष है, कृपा करें।”
वाला प्रार्थना पत्र अपलोड नजर आता है।
एडीओ पंचायत की पर्यवेक्षणीय भूमिका भी जांच के दायरे में
इन प्रविष्टियों के सामने आने के बाद सवाल केवल पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने वाले स्तर तक सीमित नहीं रहता। ग्राम पंचायत सचिव, संबंधित कर्मचारी, तकनीकी स्तर और एडीओ पंचायत की पर्यवेक्षणीय भूमिका का भी अभिलेखों के आधार पर सत्यापन जरूरी है।
यदि दूसरे ग्राम पंचायतों के आवेदन और बिल-वाउचर केवल गलती से अपलोड हुए हैं तो उन्हें सुधारा जाना चाहिए। लेकिन यदि मूल भुगतान पत्रावली में भी यही दस्तावेज लगे हैं तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि भुगतान से पहले अभिलेखों का मिलान किस स्तर पर हुआ और किस आधार पर भुगतान आगे बढ़ा।
तीन माह के भुगतानों ने निगरानी पर उठाए सवाल
हाटा ग्राम पंचायत के महज तीन माह के ऑनलाइन भुगतानों में तियरा, पंचपरा, अमांव और सिंघरौल के दस्तावेज, बार-बार वही प्रार्थना पत्र, भुगतान और बिल-वाउचर की अलग-अलग रकम तथा अलग-अलग फर्मों के नाम सामने आ रहे हैं। मानो कागज जहां मिला, वहीं से हाटा की फाइल में पहुंच गया!
सवाल है—जब ये दस्तावेज पोर्टल पर साफ दिखाई दे रहे हैं तो सत्यापन करने वालों की नजर क्यों नहीं पड़ी? फाइल में दूसरे गांव के कागज, भुगतान में अलग-अलग रकम और आवेदन वही पुराना—निगरानी की नजर फाइल पर थी या सिर्फ कमीशन पर? कहीं ऐसा तो नहीं कमीशन के चक्कर में दस्तावेज जांचना जरूरी ही नहीं समझा गया?




