फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला, 1.42 करोड़ रुपये की रकम थी होल्ड
चंदौली। फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम पर लोगों को कम ब्याज दर पर ऋण दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी वांछित अभियुक्त को चंदौली पुलिस की साइबर सेल और सर्विलांस टीम ने लखनऊ से गिरफ्तार किया है। अभियुक्त की गिरफ्तारी 15 सितंबर की रात 9:11 बजे कमिश्नरेट लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र से मोबाइल लोकेशन के आधार पर की गई। पुलिस ने उसके कब्जे से लावा प्राइम कंपनी का एक की-पैड मोबाइल फोन बरामद किया है।
थाना साइबर क्राइम में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 14/2026 में आशीष गैलवार पुत्र स्वर्गीय सुखलाल निवासी फर्रुखाबाद वांछित था। उसकी गिरफ्तारी पर पुलिस की ओर से 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
फर्जी कंपनी बनाकर दिया जाता था सस्ते ऋण का झांसा
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य ‘सत्कार निधि लिमिटेड’ समेत अन्य फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के नाम पर लोगों से संपर्क करते थे। सोशल मीडिया, मोबाइल फोन और अन्य माध्यमों से लोगों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने का प्रलोभन दिया जाता था। ऋण स्वीकृत कराने के नाम पर पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी मनी, बीमा शुल्क और अन्य शुल्क के नाम पर रकम जमा कराई जाती थी।
पुलिस के मुताबिक इसी फर्जी कंपनी की आड़ में साइबर फ्रॉड से प्राप्त धनराशि बैंक खातों में मंगाई जाती थी। शिकायतों के विश्लेषण और तकनीकी जांच में समन्वय पोर्टल तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के अभिलेखों का सत्यापन किया गया। इसमें गिरोह से जुड़े बैंक खातों और गतिविधियों के संबंध में विभिन्न राज्यों से 16 साइबर शिकायतें दर्ज मिलीं।
जांच के दौरान गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में भी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का एक मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई। पुलिस के अनुसार साइबर ठगी से प्राप्त करीब 1.42 करोड़ रुपये की धनराशि विभिन्न खातों में होल्ड पाई गई है। मामले में बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच अभी जारी है।
कार्यालय बंद कर फरार होने की तैयारी में था गिरोह
साइबर थाना पुलिस को जांच के दौरान जानकारी मिली कि चंदौली जनपद में संचालित एक कार्यालय से गिरोह की गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था। विभिन्न राज्यों में साइबर शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद गिरोह के सदस्य कार्यालय बंद कर कंप्यूटर, रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख हटाकर फरार होने की तैयारी में थे।
इसके बाद पुलिस ने 12 जून 2026 को कार्रवाई करते हुए गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस दौरान विरेन्द्र कुमार निवासी बर्थरा खुर्द, आशीष पटवा निवासी बबुरी बाजार और सोनी पत्नी शिवपूजन निवासी शाहपुर को गिरफ्तार किया गया था।
छापेमारी में मिला था बैंकिंग सामान का जखीरा
गिरोह के कब्जे से पुलिस ने तीन सीपीयू, तीन मॉनीटर, तीन की-बोर्ड, तीन माउस, दो प्रिंटर, एक कैलकुलेटर, करीब 350 पासबुक, तीन कूटरचित पहचान पत्र, 21 रजिस्टर, छह ब्लैंक चेक, तीन स्मार्टफोन, 11 अलग-अलग मोहरें, स्टांप पैड, विभिन्न सिम कार्ड और बैंकिंग एवं वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए थे।
इसी मुकदमे में फरार चल रहे आशीष गैलवार को पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी के जरिए चिनहट क्षेत्र में ट्रेस किया और गिरफ्तार कर लिया।
बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात स्वीकारी
पुलिस के अनुसार पूछताछ में अभियुक्त ने साइबर फ्रॉड के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराने तथा गिरोह के अन्य आरोपियों के संपर्क में रहने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने उसके कब्जे से बरामद मोबाइल फोन को भी जांच के लिए कब्जे में लिया है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई थाना साइबर क्राइम पुलिस द्वारा की जा रही है।
पुलिस टीम में साइबर सेल प्रभारी मिर्जा रिजवान बेग, हेड कांस्टेबल संतोष कुमार सिंह, कांस्टेबल अंकित गिरि, अनिल कुमार प्रजापति, नौशाद, महिला कांस्टेबल पूजा सिंह तथा सर्विलांस टीम के कांस्टेबल गणेश तिवारी शामिल रहे।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान व्यक्ति या संस्था के झांसे में आकर लोन, निवेश, प्रोसेसिंग फीस, बीमा या सिक्योरिटी के नाम पर ऑनलाइन धनराशि जमा न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करें अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।




